Thursday, February 12, 2026
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राजस्थान में लोकतंत्र पर हमला? कांग्रेस बोली—भाजपा ने लाखों वोट काटे

जयपुर: कांग्रेस ने राजस्थान में चल रही मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत कर हजारों समर्थक मतदाताओं के नाम काटने और फर्जी वोट जुड़वाने का खेल रचा। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम लोकतंत्र पर सीधा हमला है और पूरे मामले की फोरेंसिक जांच की जानी चाहिए।

कांग्रेस ने भाजपा पर ‘मतदाता सूची में हेराफेरी’ का आरोप लगाया

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा ने राजस्थान में एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में सुनियोजित ढंग से बदलाव कराए। दोनों नेताओं का कहना था कि पंद्रह जनवरी तक आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन तीन जनवरी के बाद अचानक वोट काटने और जोड़ने का सिलसिला तेज हो गया।

भाजपा नेताओं के दौरे के बाद अचानक बदलाव शुरू—कांग्रेस

गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि तीन जनवरी को भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष के राजस्थान दौरे के बाद पूरा खेल शुरू हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से लौटते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर मतदाता नाम काटने-जोड़ने के फॉर्म जमा कराए।

संख्या के साथ कांग्रेस का दावा—हज़ारों नाम हटाए गए

डोटासरा ने कहा कि निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा ने 937 बूथ लेवल एजेंट्स के जरिए 211 नाम जोड़ने और 5,694 मतदाता हटाने का आवेदन किया। वहीं कांग्रेस के 110 बूथ एजेंट्स ने केवल 185 वोट जोड़ने और दो हटाने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि झुंझुनू में एक दिन में 13,882 नाम हटाने के फॉर्म जमा हुए, जबकि मंडावा में 16,276, उदयपुरवाटी में 1,241 और खेतड़ी में 1,478 आवेदन लिए गए, जिसके कारण संदेह और मजबूत हो जाता है।

‘फर्जी फॉर्म, प्रिंटेड नाम और दबाव’—कांग्रेस का नया आरोप

टीकाराम जूली ने दावा किया कि मतदाता नाम हटाने वाले ज्यादातर फॉर्म पहले से प्रिंट किए गए थे, जिनमें टाइप किए हुए नाम और कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर थे। उनकी बात के मुताबिक राज्य भर में लाखों फॉर्म इसी तरीके से जमा कराए गए और मतदान अधिकारियों और बीएलओ पर दबाव बनाया गया।

कांग्रेस ने फोरेंसिक जांच और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की

जूली ने उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग से मांग की कि सभी जमा फॉर्म की फोरेंसिक जांच कराई जाए, यह पता लगाया जाए कि वे कहां छापे गए और उन्हें राजस्थान पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही। उनका कहना है कि मामले की तह तक जाने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा।

भाजपा नेताओं की भूमिका पर निशाना

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि कई भाजपा विधायकों, संभावित प्रत्याशियों और मंत्रियों को फॉर्म जमा कराने की जिम्मेदारी दे दी गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में मतदाता सूची परिवर्तन के अनुरोध एआरओ कार्यालयों तक पहुंचाए गए।

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