मोबाइल टावर चोरी गैंग का बड़ा खुलासा: पिलानी पुलिस ने 43 वारदातें सुलझाईं, तीन आरोपी गिरफ्तार

पिलानी: पुलिस ने मोबाइल टावरों से महंगे उपकरण चोरी करने वाले संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा पर्दाफाश किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई में तीन आरोपी पकड़े गए, जिनके कब्जे से ब्रेजा कार ज़ब्त की गई और अब तक 43 वारदातों के खुलासे का दावा किया गया है। लगातार नेटवर्क फेलियर और टावर अलर्ट सिस्टम के बाद खुला यह मामला पूरे प्रदेश में सक्रिय टावर चोरों पर बड़ी चोट माना जा रहा है।

चिड़ावा वृत के निर्देशन में गठित विशेष दल ने रात के समय गश्त के दौरान भगीना गांव में मोबाइल टावर से उपकरण उड़ाने की कोशिश कर रहे चोरों को दबोच लिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों की बहादुरी और पुलिस की समय पर हस्तक्षेप से गिरोह का खुलासा हो सका, जिसमें तीन युवक मौके पर ही पकड़ लिए गए और पुलिस ने उनके कब्जे से ब्रेजा कार बरामद की।

इसी घटना से कुछ देर पहले टावर कंपनी में अधिकारी पद पर कार्यरत प्रदीप सिंह को साइट डाउन अलार्म मिला। पड़ोसियों से जानकारी कर पुष्टि करने पर एक संदिग्ध गाड़ी और टावर पर चढ़े व्यक्ति के दिखाई देने के बाद सूचना पुलिस तक पहुंची। ग्रामीणों ने एक आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि पुलिस टीम ने पहुंचकर दो अन्य युवकों को कार से दबोचा।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मनजीत उर्फ मोनू निवासी बेरी पिलानी, सचीन निवासी लाड चरखी दादरी और भावसागर निवासी हलालपुर सोनीपत शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया कि भावसागर पहले मोबाइल टावर इलेक्ट्रिशियन के तौर पर काम कर चुका है और टावर पर चढ़ने तथा उपकरण खोलने में दक्ष था। पुलिस के अनुसार गिरोह पिछले दो वर्षों से संगठित रूप से चोरी कर रहा था और राजस्थान भर में दर्जनों वारदातें कर चुका है।

आरोपियों ने जयपुर, चुरू, सूरजगढ़, पिलानी, मलसीसर, नरहड़, उदयपुर, अजमेर, सिरोही, ब्यावर, दौसा और कोटपुतली सहित कई जिलों में मोबाइल टावरों से RRU व अन्य महंगे उपकरण निकाल कर चोरी करने की बात कबूल की। पूछताछ में यह भी सामने आया कि कुछ वारदातें पिछले 10 से 15 दिनों में ही की गई थीं, जबकि कई घटनाएं 2025 और 2024 तक की हैं।

थानाधिकारी चंद्रभान के नेतृत्व में चल रही जांच में पुलिस रिमांड के लिए आवेदन किया गया है। अधिकारी ने बताया कि गिरोह के और भी सदस्यों की पहचान और अन्य राज्यों में हुई चोरी के कनेक्शन तलाशे जा रहे हैं। शुरुआती जांच से स्पष्ट है कि गैंग के पास चोरी किए उपकरणों को ठिकाने लगाने और सप्लाई चैन तैयार करने की भी व्यवस्था थी।

लगातार टावर चोरी की घटनाओं के बाद टेलीकॉम कंपनियों ने अपने उपकरण संरक्षण, अलर्ट सिस्टम एक्टिवेशन और ग्रामीण निगरानी नेटवर्क मजबूत करने पर विचार शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने की घटनाओं के पीछे यही टावर चोरी का नेटवर्क जिम्मेदार माना जा रहा है।

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