मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। केंद्र और राज्य में साथ चल रही BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के रिश्तों में मुंबई महानगर क्षेत्र में खटास खुलकर सामने आ गई है। मीरा-भायंदर महानगरपालिका और कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में बदले समीकरणों ने BMC मेयर चुनाव से पहले महायुति में तनाव बढ़ा दिया है। स्थानीय सत्ता से लेकर मुंबई की राजनीति तक, हर मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है।
मीरा-भायंदर में कांग्रेस और शिंदे गुट का चौंकाने वाला गठबंधन
मीरा-भायंदर नगर निगम में राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिंदे गुट की शिवसेना और कांग्रेस के नगर सेवक एक साथ आ गए हैं और उन्होंने मिलकर “मीरा-भायंदर सिटी डेवलपमेंट फ्रंट” के नाम से संयुक्त विपक्षी मंच बनाया है। इस गठबंधन में कांग्रेस के 13 नगर सेवक, शिवसेना शिंदे गुट के 3 नगर सेवक और एक निर्दलीय नगर सेवक शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से BJP के साथ शिंदे गुट के रिश्तों में तनाव और गहरा गया है।
बीजेपी के बहुमत के खिलाफ बना संयुक्त मोर्चा
2026 के मीरा-भायंदर नगर निगम चुनाव में BJP को 95 में से 78 सीटें मिली थीं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस को 13 सीटें और शिंदे गुट को 3 सीटें मिली थीं। इसके बावजूद शिंदे गुट ने कांग्रेस के साथ मिलकर विपक्षी गठबंधन बना लिया। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि यह गठबंधन स्थानीय भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है और 16 पार्षदों ने दलीय राजनीति से ऊपर उठकर शहर के हित में फैसला लिया है।
KDMC में भी बदले राजनीतिक समीकरण
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में भी हालात तेजी से बदले हैं। यहां शिंदे गुट के पास 53 सीटें हैं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पास 5 सीटें हैं और BJP को 50 सीटें मिली हैं। 122 सीटों वाली इस नगर पालिका में उद्धव गुट को 11 सीटें मिली हैं। मेयर की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और BJP के पास इस वर्ग से कोई नगर सेवक नहीं है, जबकि शिंदे गुट और MNS के पास एसटी वर्ग के नगर सेवक मौजूद हैं। इसी वजह से शिंदे गुट और MNS की दावेदारी मजबूत हो गई है।
BMC मेयर को लेकर बढ़ता तनाव
16 जनवरी को BMC सहित 29 नगरपालिकाओं के नतीजे आए थे। BMC चुनाव में BJP को 89 सीटें मिलीं और शिंदे गुट को 29 सीटें हासिल हुईं। महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा 114 पार कर लिया, लेकिन मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने साफ कहा है कि मुंबई को महायुति का ही मेयर मिलेगा और शिवसेना से मेयर बनना बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि होगी।
महायुति में दरार के संकेत?
मीरा-भायंदर, KDMC और BMC तीनों जगहों पर बदले हालात ने यह संकेत दे दिए हैं कि BJP और शिंदे गुट के बीच तालमेल आसान नहीं रह गया है। स्थानीय राजनीति में बनते नए गठबंधन आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकते हैं।





