सूरत:में मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष कई परिवारों के लिए खुशियों की जगह गहरे शोक का कारण बन गया। सूरत सहित राज्य के विभिन्न शहरों में पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल किए गए धारदार और प्रतिबंधित मांझे ने मासूम बच्चों से लेकर पूरे परिवारों की जान ले ली। पतंग उड़ाने का उत्साह देखते ही देखते दर्दनाक हादसों में बदल गया।
जहांगीरपुरा में मासूम की दर्दनाक मौत
सूरत के जहांगीरपुरा क्षेत्र की आनंद विला सोसाइटी में एक आठ वर्षीय बच्चा अपनी सोसाइटी परिसर में साइकिल चला रहा था। उसी दौरान आसमान से कटकर आई पतंग की धारदार डोर उसके गले में फंस गई। मांझा इतना तेज था कि बच्चे के गले में गहरा घाव हो गया। परिजन और स्थानीय लोग तुरंत उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यह घटना पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का कारण बन गई।
जिलानी पुल पर पूरा परिवार हादसे का शिकार
दूसरी हृदयविदारक घटना सूरत के जिलानी पुल पर सामने आई। कोलकाता का रहने वाला एक परिवार मोटरसाइकिल से पुल पार कर रहा था। इसी दौरान चालक के गले में अचानक पतंग का मांझा उलझ गया। मांझे से बचने की कोशिश में मोटरसाइकिल का संतुलन बिगड़ गया और तेज रफ्तार में वाहन पुल की रेलिंग से टकरा गया। टक्कर के बाद मोटरसाइकिल सवार तीनों लोग नीचे खड़े एक रिक्शा पर जा गिरे। हादसे में पिता और उनकी मासूम बेटी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल महिला ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कुछ ही पलों में पूरा परिवार खत्म हो गया।
त्योहार की खुशियां बदलीं मातम में
मकर संक्रांति, जिसे पतंगों और उल्लास का पर्व माना जाता है, इस बार कई घरों में मातम लेकर आया। जिन परिवारों ने अपने बच्चों और परिजनों को खोया, उनके लिए यह त्योहार अब कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है।
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ मांझा
गुजरात में चाइनीज मांझे और कांच लगे धागों पर सख्त प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसके बावजूद इनका इस्तेमाल खुलेआम किया गया। प्रशासन के अनुसार राज्य भर में अब तक मांझे से जुड़ी घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं।
कार्रवाई तेज, लेकिन सवाल कायम
हादसों के बाद पुलिस ने जानलेवा मांझा बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में जांच अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि सवाल यह है कि यदि पहले से सख्ती बरती जाती, तो शायद कई जानें बचाई जा सकती थीं।
समाज के लिए सख्त चेतावनी
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पतंगबाजी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। त्योहार का आनंद तभी संभव है, जब सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाए।





