मंड्रेला: कस्बे में जहां चार-चार दिन तक लोगों को पानी नहीं मिल रहा, वहीं वार्ड 1 में जलदाय विभाग की अनदेखी के कारण रोजाना हजारों लीटर पीने योग्य पानी सड़क पर बह रहा है। एक महीने से क्षतिग्रस्त पड़ी पाइपलाइन ने जल संकट को और विकराल बना दिया, जिससे स्थानीय लोग विभाग के खिलाफ आक्रोशित हैं।
जल संकट के बीच पानी की खुली बर्बादी
मंड्रेला कस्बे में भीषण जल संकट के बीच रोष बढ़ रहा है, क्योंकि वार्ड 1 में गुमान पार्क से पीपलों का मोहल्ला जाने वाले मार्ग पर जलदाय विभाग की पाइपलाइन एक महीने से टूटी पड़ी है। लोगों के मुताबिक रोजाना हजारों लीटर जल सड़कों व नालियों में बहकर व्यर्थ हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि समस्या की लिखित और मौखिक शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
चार दिन तक नहीं मिलता पानी, मजबूरी में मंगवाने पड़ रहे टैंकर
कस्बे के कई मोहल्लों में स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को चार-चार दिन तक नलों से पानी नहीं मिल रहा। घरों तक सप्लाई नहीं पहुंचने पर नागरिकों को निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में भी इतनी परेशानी होना साबित करता है कि विभाग लापरवाह है और पानी के संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं।
सड़क पर स्थायी रूप से भरा पानी, दुर्घटनाओं का खतरा
टूटी पाइपलाइन के आसपास लगातार पानी जमा रहने के कारण सड़क पर कीचड़ और फिसलन की स्थिति रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार बाइक सवार फिसलते-फिसलते बचे हैं। जलभराव से आवागमन बाधित हो रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी इसे देखने तक नहीं पहुंचे, जिससे आमजन का धैर्य टूट रहा है।
वार्डवासियों ने जताई नाराजगी, दी चेतावनी
वार्ड निवासी रूपेश रूंगटा ने कहा कि पूरे कस्बे में जल किल्लत होने के बावजूद बहुमूल्य पानी को सड़कों पर बर्बाद होते देखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सीधी-सीधी लापरवाही है और जिम्मेदार अधिकारी समस्या से आंखें फेर रहे हैं।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता शुभम जोशी ने विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता बूंद-बूंद को तरस रही है और जलदाय विभाग उदासीन बैठा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाइपलाइन की मरम्मत तत्काल नहीं की गई तो वार्डवासी आंदोलन करने पर मजबूर होंगे और स्थिति बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
जलदाय विभाग की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते, फोन उठाना बंद कर देते हैं और हर बार केवल आश्वासन देकर पीछा छुड़ा लेते हैं। लगातार जल बर्बादी ने सप्लाई शेड्यूल को प्रभावित कर दिया है, जिससे पूरा मंड्रेला पानी संकट की गिरफ्त में आ गया है।





