चिड़ावा: बावलिया बाबा के समाधि स्थल पर आयोजित वार्षिक मेले में जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहीं पिछले 15 वर्षों से लगातार एक परिवार की निस्वार्थ सेवा आस्था और समर्पण की मिसाल बन चुकी है। लक्ष्मीकांत वर्मा के नेतृत्व में हर वर्ष मेले और जागरण के दौरान श्रद्धालुओं के लिए चाय, कॉफी और बड़ा-सूसवा का प्रसाद वितरित किया जाता है, जो बाबा के प्रति गहरी श्रद्धा और सामाजिक सेवा भावना को दर्शाता है।
15 वर्षों से निरंतर चल रही सेवा परंपरा
बावलिया बाबा के मेले में लक्ष्मीकांत वर्मा द्वारा शुरू की गई यह सेवा परंपरा पिछले डेढ़ दशक से निरंतर जारी है। मेले के दौरान बाबा के समाधि स्थल पर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की यह व्यवस्था बिना किसी प्रचार के पूरी निष्ठा के साथ निभाई जाती है। यह सेवा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि सामाजिक सहभागिता का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।
जागरण और मेले में श्रद्धालुओं को मिलता है सेवा का संबल
मेले और रात्रिकालीन जागरण के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच चाय, कॉफी और बड़ा-सूसवा का प्रसाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। इस सेवा कार्य में पवन वर्मा, सत्यनारायण वर्मा, राहुल वर्मा, प्रज्जवल वर्मा, आशीष वर्मा और तरुण वर्मा पूरी श्रद्धा से भाग लेते हैं। वहीं मोहित वर्मा, योगेश वर्मा, नरेश वर्मा, मोहित कुमावत और तरुण भी व्यवस्थाओं को संभालते हुए सेवा को सुचारु रूप से संचालित करते हैं।
सामूहिक सहभागिता से मजबूत होती सामाजिक आस्था
इस सेवा कार्य की विशेषता यह है कि सभी सदस्य मिलकर एक टीम के रूप में कार्य करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, प्रसाद की गुणवत्ता और समयबद्ध वितरण का पूरा ध्यान रखा जाता है। बाबा के प्रति आस्था और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना के चलते यह सेवा हर वर्ष और अधिक सशक्त रूप में सामने आती है।
स्थानीय स्तर पर बन रही प्रेरणा की मिसाल
बावलिया बाबा के मेले में लक्ष्मीकांत वर्मा और उनके परिवार द्वारा की जा रही यह निरंतर सेवा स्थानीय युवाओं और समाज के अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। बिना किसी अपेक्षा के की जा रही यह सेवा धार्मिक आयोजनों में सामाजिक सहयोग की भूमिका को भी रेखांकित करती है।





