पिलानी: राजस्थान फार्मासिस्ट भर्ती को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। फार्मासिस्ट संघर्ष समिति ने मांग की है कि फार्मासिस्ट भर्ती मेरिट प्लस बोनस के आधार पर पूर्व की तरह ही कराई जाए, ताकि कम वेतन पर कार्यरत संविदा फार्मासिस्टों को न्याय मिल सके। इसी मांग को लेकर पिलानी में विधायक पितराम सिंह काला को ज्ञापन सौंपा गया।
फार्मासिस्ट भर्ती नियमों में बदलाव का विरोध, विधायक को सौंपा ज्ञापन
पिलानी में राजस्थान फार्मासिस्ट संगठन से संबद्ध फार्मासिस्ट संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने विधायक पितराम सिंह काला के आवास पर पहुंचकर फार्मासिस्ट भर्ती नियमों को लेकर ज्ञापन सौंपा। समिति ने मांग की कि आगामी भर्ती प्रक्रिया मेरिट प्लस बोनस के आधार पर पूर्व के नियमों के अनुसार कराई जाए, जिससे लंबे समय से अल्प वेतन पर सेवाएं दे रहे फार्मासिस्टों को लाभ मिल सके।
सर्विस रूल 1965 में संशोधन का विरोध, संविदा फार्मासिस्टों के हितों की मांग
फार्मासिस्ट संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि सर्विस रूल 1965 में ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जाना चाहिए, जो संविदा फार्मासिस्टों के हितों के खिलाफ हो। समिति का कहना है कि यदि भर्ती नियमों में बदलाव किया गया तो इससे वर्षों से कम वेतन पर कार्यरत फार्मासिस्टों के साथ अन्याय होगा और उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विधायक पितराम सिंह काला ने दिया भरोसा, विधानसभा में उठेगा मुद्दा
विधायक पितराम सिंह काला ने फार्मासिस्ट एसोसिएशन से जुड़े अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि फार्मासिस्ट भर्ती का मुद्दा विधानसभा में मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार से यह मांग की जाएगी कि भर्ती प्रक्रिया पूर्व के नियमों के अनुरूप ही कराई जाए, ताकि फार्मासिस्टों को पूरा न्याय मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल में दीपक सरवन, विकास कुमार भार्गव सहित कई पदाधिकारी रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान फार्मासिस्ट संघर्ष समिति की ओर से विकास कुमार भार्गव, दीपक सरवन, करण जमालपुरिया और ज्योति जांगिड़ मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि फार्मासिस्ट भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, न्यायसंगत और पूर्व नियमों के अनुसार ही लागू की जाए।
फार्मासिस्ट भर्ती 2026 को लेकर बढ़ी हलचल, अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार पर
फार्मासिस्ट भर्ती 2026 को लेकर प्रदेशभर में चर्चा तेज हो गई है। संविदा फार्मासिस्टों और अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि सरकार मेरिट + बोनस आधारित भर्ती प्रणाली को बरकरार रखेगी और वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों के साथ न्याय करेगी।





