नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एनएक्सटी कान्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुए भारत की उभरती वैश्विक शक्ति और आत्मनिर्भरता के मंत्र “वोकल फॉर लोकल” को वास्तविकता में बदलने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज विश्व 21वीं सदी के भारत की ओर बेहद उत्सुकता से देख रहा है और भारत अब केवल कार्यबल ही नहीं, बल्कि विश्व शक्ति बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आज विश्व का नया विनिर्माण केंद्र बन रहा है, जहां पहले आयात होने वाले सामानों का अब देश में ही निर्माण हो रहा है और भारत इन उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है।

भारत में हर दिन हो रहा कुछ नया
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत एक ऐसा देश है जहां हर दिन कुछ नया हो रहा है, सकारात्मक खबरें बन रही हैं और रोजाना नए रिकॉर्ड स्थापित हो रहे हैं। “दुनिया भर के लोग भारत को समझना चाहते हैं और यहां आना चाहते हैं। यह भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान और प्रभाव का प्रमाण है,” उन्होंने कहा। इस संदर्भ में उन्होंने हाल ही में प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ 2025 का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि महाकुंभ ने पूरे विश्व को चकित कर दिया कि कैसे एक अस्थायी शहर में नदी के किनारे करोड़ों लोगों ने पवित्र स्नान किया। “यह भारत के आयोजन कौशल और नवाचार की मिसाल है, जिसे देखकर विश्व अचंभित है,” पीएम ने गर्व के साथ कहा।
दुनिया की नई फैक्ट्री बन रहा भारत
प्रधानमंत्री ने भारत के औद्योगिक विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश अब सेमीकंडक्टर से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक सब कुछ बना रहा है। “दशकों तक दुनिया भारत को अपना बैक ऑफिस कहती थी, लेकिन आज भारत दुनिया की नई फैक्ट्री बन रहा है। हमारा देश उन उत्पादों का निर्यात केंद्र बन रहा है, जो कभी आयात पर निर्भर थे,” उन्होंने कहा। इस संदर्भ में उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” और “मेक इन इंडिया” पहल की सफलता को रेखांकित किया, जिसके चलते भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति हासिल कर रहा है। पीएम ने कहा कि विश्व अब भारत की सफलता को विस्तार से जानना चाहता है और इसके पीछे देश की नीतियों और नवाचार का बड़ा योगदान है।
किसानों की उपज वैश्विक बाजार तक
किसानों के सशक्तिकरण पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि पहले स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाले किसान अब अपनी उपज के साथ वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहे हैं। “हमारा लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है जहां किसान समृद्ध और सशक्त हों। इसके लिए हमने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के मंत्र को अपनाया है,” उन्होंने कहा। इस संदर्भ में उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं का उल्लेख किया, जो किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रही हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और युवा सशक्तिकरण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि भारत का युवा सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। “एनईपी ने छात्रों को किताबों से हटकर सोचने का अवसर दिया है। यह नीति उन्हें वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है,” उन्होंने कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए विश्वस्तरीय नेतृत्व की जरूरत है, और एनईपी इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
पुराने कानूनों का अंत और नई सोच
प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में सरकार द्वारा खत्म किए गए करीब डेढ़ हजार पुराने कानूनों का उल्लेख किया, जो अंग्रेजी शासन के दौरान बने थे और आजादी के बाद भी चलन में थे। उन्होंने ड्रैमेटिक परफॉर्मेंस एक्ट का उदाहरण देते हुए कहा, “यह कानून डेढ़ सौ साल पहले अंग्रेजों ने बनाया था ताकि ड्रामे और थियेटर का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ न हो। इसमें प्रावधान था कि अगर सार्वजनिक स्थान पर 10 लोग नृत्य करते पाए जाएं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता था। शादी में बारात निकले और 10 लोग नाच रहे हों, तो दूल्हे सहित पुलिस उन्हें पकड़ सकती थी। यह कानून आजादी के 75 साल बाद तक चलता रहा। हमारी सरकार ने इसे खत्म किया।”




