पिलानी: थाना क्षेत्र से एक बड़ा फाइनेंस फ्रॉड केस सामने आया है, जहां मण्णपुरम फाइनेंस लिमिटेड की पिलानी ब्रांच में नकली सोना गिरवी रखकर करीब 30 लाख रुपये का लोन पास किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने गहन जांच के बाद ब्रांच मैनेजर संदीप सैनी और सहायक ब्रांच मैनेजर नरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला न केवल वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम लोगों के भरोसे को भी झटका देता है।
कैसे सामने आया मण्णपुरम फाइनेंस पिलानी घोटाला
दिनांक 9 दिसंबर 2025 को मण्णपुरम फाइनेंस लिमिटेड के एरिया मैनेजर लोकेश शर्मा ने पुलिस थाना पिलानी में रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट में बताया गया कि मण्णपुरम फाइनेंस एक गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था है, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के अंतर्गत पंजीकृत है और देशभर में 3500 से अधिक शाखाओं के माध्यम से सोने के बदले लोन प्रदान करती है। पिलानी के पंचवटी क्षेत्र में स्थित शाखा में ऑडिट के दौरान भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।
ऑडिट में खुलासा: नकली गहनों पर पास हुआ लोन
12 अक्टूबर से 24 अक्टूबर 2025 के बीच ऑडिटर हेमराज मीणा और मनीष कुमार द्वारा किए गए लेखा परीक्षण में सामने आया कि पिलानी शाखा में करीब 30,08,281 रुपये का गबन किया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ब्रांच मैनेजर संदीप सैनी और सहायक ब्रांच मैनेजर नरेन्द्र सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अंडर स्टोन, जीरो प्यूरीटी और आंशिक रूप से गायब सोने के गहने गिरवी रखवाए और उन्हें असली सोना बताकर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर लोन स्वीकृत कराया।
पुलिस जांच: CCTV फुटेज और बैंक खातों से पुख्ता सबूत
पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह राजावत के मार्गदर्शन में, वृत्ताधिकारी विकास धीधवाल के सुपरविजन में पुलिस थाना पिलानी की टीम ने मामले की जांच की। जांच के दौरान मण्णपुरम फाइनेंस ब्रांच के रिकॉर्ड खंगाले गए और सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। अनुसंधान में सामने आया कि करीब 10 बैंक खातों में इस फर्जी लोन की राशि ट्रांसफर की गई थी, जिससे गबन की पुष्टि हुई।
आरोपी गिरफ्तार, पुलिस रिमांड पर गहन पूछताछ जारी
प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित पाए जाने पर पुलिस ने संदीप सैनी और नरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस घोटाले में कोई अन्य कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति शामिल तो नहीं था।
मण्णपुरम फाइनेंस की साख को पहुंचा नुकसान
पुलिस के अनुसार, इस प्रकार की धोखाधड़ी से न केवल कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ, बल्कि मण्णपुरम फाइनेंस जैसी प्रतिष्ठित एनबीएफसी की साख पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क और लोन प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही हैं।
पुलिस टीम की भूमिका
इस कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस थाना पिलानी के थानाधिकारी चन्द्रभान ने किया। जांच अधिकारी कमल सिंह ने पूरे प्रकरण में अहम भूमिका निभाई, वहीं अरविन्द मान और रतन सिंह ने तकनीकी और फील्ड जांच में सहयोग किया।





