पिलानी: क्षेत्र के धींधवा आथूणा गांव में 29 अगस्त को प्रशासनिक कार्रवाई ने दो गरीब परिवारों की जिंदगी को झकझोर दिया। बिना किसी पूर्व आदेश या नोटिस के जेसीबी चलाकर पक्के मकान और दुकानें तोड़ दी गईं। इस घटना ने गांव में प्रशासनिक तानाशाही, जातिगत भेदभाव और प्रभावशाली लोगों की दबाव राजनीति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनीता देवी का आशियाना मलबे में दफन
ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाली सुनीता देवी का घर अचानक ढहा दिया गया। घटना के समय वह मजदूरी पर थीं। घर लौटने पर उन्होंने अपने बर्तन, चूल्हा और यहां तक कि बच्चों का बिस्तर भी मलबे में दबा देखा।
विकास कुमार की रोज़ी-रोटी पर चली जेसीबी
विकास कुमार ने अपने दिवंगत पिता रमेश कुमार द्वारा खरीदे गए भूखंड पर ऋण लेकर दो पक्की दुकानें बनवाई थीं। लेकिन प्रशासन ने बिना आदेश दिखाए उनकी दुकानें ढहा दीं। इससे उनका एकमात्र रोज़गार का सहारा खत्म हो गया।
कोर्ट आदेश और स्टे के बावजूद कार्रवाई
खातेदार रोहितास और उनके वकील गोरधन ने बताया कि मामला कोर्ट में लंबित था और 26 अगस्त को कोर्ट ने पूर्व आदेश को स्थगित करते हुए स्टे दिया था। रोहितास को स्टे की कॉपी 28 अगस्त की शाम मिली। लेकिन 29 अगस्त को नायब तहसीलदार हरीश यादव ने पुराने आदेश के आधार पर कार्रवाई करते हुए मकान ढहा दिया।
नायब तहसीलदार की सफाई
नायब तहसीलदार हरीश यादव ने कहा कि उन्हें उच्च अधिकारियों से लिखित आदेश मिला था और उसी आधार पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि जब उन्हें स्टे ऑर्डर दिखाया गया, तब कार्रवाई बीच में ही रोक दी गई थी।





