चिड़ावा: बिड़ला परिवार के वरदाता और जन-जन की आस्था के प्रतीक परमहंस पंडित गणेशनारायणजी बावलिया बाबा के निर्वाणोत्सव पर इस वर्ष भी दिव्य संदेश यात्रा का भव्य आयोजन होगा। भगवत जन कल्याण मिशन द्वारा 15 दिसंबर से शुरू हो रही यह आठ दिवसीय यात्रा बाबा के चमत्कारों, भजनों और जीवन चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेकर निकलेगी। आयोजन समिति के अनुसार इस यात्रा से हजारों भक्त जुड़ेंगे, जिनके स्वागत की तैयारियां गांव-गांव में शुरू हो गई हैं।
भगवत जन कल्याण मिशन की ओर से पिछले 13 वर्षों से आयोजित होने वाली परमहंस दिव्य संदेश यात्रा की तैयारियां इस बार भी पूरी गति से शुरू हो चुकी हैं। अभयसिंह बडेसरा और मुकेश जलिन्द्रा ने बताया कि यात्रा मार्ग में पड़ने वाले गांवों—इंदिरा नगर, सूरजगढ़, बुहाना, सिंघाना व खेतड़ी सहित कई स्थानों पर बाबा के भक्त स्वागत व प्रबंध में जुट गए हैं। आयोजन समिति लगातार यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा कर रही है।
15 दिसंबर को सुबह सवा दस बजे चिड़ावा के कॉलेज रोड स्थित सनातन आश्रम पोद्दार पार्क परिसर में पूजन और आरती के साथ यात्रा का शुभारंभ होगा। पूजा-अर्चना के बाद रथ में विराजमान बाबा के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भक्त यात्रा में शामिल होंगे।
आयोजन समिति के अनुसार यात्रा के दौरान विश्व सनातन धर्म संघ के राष्ट्रीय संयोजक पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी विभिन्न पड़ाव स्थलों पर बाबा के जीवन चरित्र, चमत्कारों और उनके दिव्य संदेशों के बारे में लोगों को अवगत कराएंगे। भक्तों के लिए बाबा के भजन, साहित्य और जीवन गाथा भी यात्रा के दौरान उपलब्ध रहेंगे।
हर पड़ाव पर बाबा के दिव्य स्वरूप की आरती, मंगलपाठ और प्रसाद वितरण किया जाएगा। बड़ी संख्या में भक्त इन धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
15 दिसंबर को यात्रा सनातन आश्रम परमहंस पीठ से रवाना होकर सेहीकला और स्यालू से होते हुए सूरजगढ़ पहुंचेगी।
16 दिसंबर को सूरजगढ़ से आगे लोटिया, धींगड़िया और बड़बर होते हुए यात्रा बुहाना पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम रहेगा।
17 दिसंबर को पचेरी, गोद और शिमला के रास्ते यात्रा सिंघाना पहुंचेगी।
18 दिसंबर को सिंघाना से रवाना होकर कॉपर, गोठड़ा और कोलिहान पहुंचने के बाद यात्रा खेतड़ी में रात्रि विश्राम करेगी।
19 दिसंबर को डाडा फतेहपुरा, नालपुर और त्योंदा से होकर यात्रा टीबा बसई पहुंचेगी। रात्रि विश्राम के बाद
20 दिसंबर को मेहाडा, सिहोड़ और मावंडा से होकर यात्रा बबाई पहुंचेगी।
21 दिसंबर को बबाई से शुरू होकर यात्रा बडाऊ, रसूलपुर और नंगली से होते हुए जसरापुर पहुंचेगी, जहां रात को ठहराव किया जाएगा।
22 दिसंबर को अंतिम दिन यात्रा जसरापुर से रवाना होकर लोयल, चनाना और सुलताना से होते हुए चिड़ावा पहुंचेगी, जहां बाबा की आरती के साथ यात्रा का भव्य समापन होगा।




