नवलगढ़: राहुल गांधी का ‘संगठन सृजन अभियान’ झुंझुनूं कांग्रेस में सृजन के बजाय सियासी संग्राम का अखाड़ा बनता जा रहा है। जिले में लगातार दूसरे दिन कांग्रेस की अंतर्कलह और गुटबाजी खुलकर सड़कों पर आ गई। मंगलवार को नवलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मुकुंदगढ़ में आयोजित बैठक में पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा के एक बयान के बाद भूचाल आ गया। उन्होंने जैसे ही कहा कि “वे गद्दारों के साथ मंच साझा नहीं करेंगे,” माहौल इतना गरमा गया कि जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा को बैठक छोड़कर जाना पड़ा।
“गद्दारों के साथ मंच पर नहीं बैठूंगा” – डॉ. शर्मा
मामला मंगलवार को मुकुंदगढ़ के सुरोलिया गेस्ट हाउस का है, जहां ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत ब्लॉक कांग्रेस की बैठक चल रही थी। बैठक में अभियान के प्रभारी प्रवीण डावर और पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा पहले से मौजूद थे। जैसे ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा बैठक में पहुंचे, डॉ. राजकुमार शर्मा के समर्थकों ने उनके खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच डॉ. शर्मा ने माइक पर कहा कि “वे गद्दारों के साथ मंच साझा नहीं करेंगे।” उनके इस बयान के बाद कार्यकर्ताओं का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने कांग्रेस व डॉ. शर्मा के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए, जिससे बैठक में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बैठक छोड़ निकले जिलाध्यक्ष, बाहर भी हुई नारेबाजी
कार्यकर्ताओं के उग्र विरोध और बिगड़ती स्थिति को देखते हुए बैठक को बीच में ही समाप्त करना पड़ा। जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा बैठक से निकलकर चले गए। लेकिन कार्यकर्ताओं का गुस्सा यहीं शांत नहीं हुआ। उन्होंने गेस्ट हाउस के बाहर भी सुंडा के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। समर्थक उन पर पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे थे। हंगामे की वजह से संगठन को मजबूत करने के लिए बुलाई गई यह बैठक पूरी तरह विफल साबित हुई।
खेतड़ी से नवलगढ़ तक, दो दिन से जारी है ‘दंगल’
झुंझुनूं कांग्रेस में यह घमासान सिर्फ नवलगढ़ तक ही सीमित नहीं है। इससे ठीक एक दिन पहले, सोमवार को खेतड़ी में हुई बैठक में भी गुटबाजी का ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। वहां पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पूर्व प्रत्याशी मनीषा गुर्जर के समर्थक आमने-सामने हो गए थे और उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। दोनों ही जगहों पर प्रभारी प्रवीण डावर कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ाते नजर आए, लेकिन उनकी अपील का कोई खास असर नहीं दिखा। लगातार दो दिनों की इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान कांग्रेस का यह अभियान झुंझुनूं में गुटबाजी की जड़ों को खत्म करने के बजाय उसे और गहरा कर रहा है।





