चिड़ावा हुआ भगवामय: विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब, कलश यात्राओं ने रचा इतिहास

चिड़ावा: नगर ने शनिवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक संगठन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। सजीव झांकियों के साथ निकाली गई भव्य कलश यात्राओं ने पूरे नगर को भगवामय कर दिया। सिर पर मंगल कलश और चुनरी धारण कर आगे बढ़ती मातृशक्ति तथा जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो उठा।

नगर के विभिन्न मंदिरों से प्रारंभ हुई अलग-अलग कलश यात्राएं जब नगर मार्गों से होकर गुजरीं, तो हर वर्ग, हर आयु और हर समाज की सहभागिता देखने को मिली। सभी यात्राओं का समापन ग्रेटर कृष्णा मैरिज गार्डन, चिड़ावा में हुआ, जहां विराट हिंदू सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विराट हिंदू सम्मेलन के अवसर पर निकाली गई कलश यात्राओं में सैंकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने सहभागिता की। मंगल कलश, पारंपरिक वेशभूषा और सजीव झांकियों ने चिड़ावा की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, वैसे-वैसे नगर भगवा रंग में रंगता चला गया और हर ओर धार्मिक उत्साह का दृश्य नजर आया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि दिनेश गिरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है। उन्होंने समाज को छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें अपनाने का संकल्प दिलाते हुए पंच परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों को जीवन में उतारने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जागरूक समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।

मुख्य वक्ता के रूप में स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीकांत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बताते हुए कहा कि जब देश गुलामी के दौर से गुजर रहा था, तब हिंदू समाज की स्थिति अत्यंत कमजोर थी।

ऐसे समय में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना ने समाज को संगठन और दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि के लिए समाज का संगठित होना अत्यंत आवश्यक है। युवाओं से संस्कारों के साथ जुड़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महापुरुषों के उदाहरण प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर अध्यक्ष सीताराम वर्मा ने समाज, प्रशासन और सम्मेलन में पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मंच पर फूलचंद सोलंकी, गुलाब मेघवाल और रविंद्र ढोलपुरिया सहित समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिला पुरुष शामिल रहे।

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