Friday, February 13, 2026
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चिड़ावा में सांडों का तांडव, 40 मिनट तक सड़क जाम, प्रशासन रहा नदारद

चिड़ावा: नगरपालिका क्षेत्र में प्रशासनिक आदेशों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। वार्ड नंबर 18 स्थित रानी सती दादी मंदिर के सामने मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे दो सांडों के बीच हुई भीषण लड़ाई ने आमजन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। खुलेआम सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को लेकर कलेक्टर के आदेशों की धज्जियां उड़ती नजर आईं, वहीं करीब 40 मिनट तक चली इस लड़ाई से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बना रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रानी सती दादी मंदिर के सामने मुख्य मार्ग पर अचानक दो सांड आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते यह लड़ाई इतनी उग्र हो गई कि सड़क से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक सहम गए। आम रास्ता पूरी तरह जाम हो गया और लोग इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाते नजर आए। सांडों की लड़ाई के चलते आसपास के दुकानदारों ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सांडों की यह लड़ाई करीब 40 मिनट तक लगातार चलती रही। मौके पर मौजूद नागरिकों ने पानी डालकर, शोर मचाकर और अन्य तरीकों से सांडों को अलग करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सका। इस दौरान किसी प्रशासनिक या नगरपालिका टीम की मौजूदगी नहीं दिखी, जिससे लोगों में नाराजगी और भय दोनों बढ़ते चले गए।

लड़ाई के दौरान एक सांड ने सड़क किनारे खड़ी पिकअप गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इस झगड़े में सड़क पर धूल का गुबार छा गया और दृश्य और भी भयावह हो गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन यदि कोई राहगीर या बच्चा इसकी चपेट में आ जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के कबूतर खाना चौक पर भी सोमवार शाम को सांड़ के हमले से एक राहगीर घायल हो गया था। पिछले दिनों भी इस तरह कि घटनाएं सामने आई हैं।

चिड़ावा नगरपालिका क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके बावजूद कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों के बाद भी सड़कों पर खुलेआम घूम रहे सांड प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करते हैं। वार्ड 18 की यह घटना न केवल नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आमजन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोलती है।

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बेसहारा पशुओं को पकड़ने और सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की जाती, तो इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती थीं। नागरिकों ने नगरपालिका और जिला प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है।

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