चिड़ावा, 14 फरवरी: शनिवार को तालुका विधिक सेवा समिति चिड़ावा में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहनलाल बेदी की अध्यक्षता में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईडीबीआई बैंक से जुड़े प्री-लिटिगेशन विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत में बैंक ऋण विवाद, बकाया लोन निपटान और आपसी समझौते के जरिए मामलों के समाधान पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे।
बैंक और न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन
विशेष लोक अदालत की कार्यवाही अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहनलाल बेदी के नेतृत्व में संपन्न हुई। तालुका विधिक सेवा समिति की सचिव बंटी कुमारी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि प्री-लिटिगेशन लोक अदालत का उद्देश्य बैंक लोन विवादों को न्यायालय में लंबित होने से पहले ही सुलझाना है।
इस दौरान अधिवक्ता अभिषेक महमिया, रोबिन शर्मा, संजय गोयल, अनिल गोदारा और मनोहर के साथ विजय डाबला, दीपक स्वामी, अनिल मान तथा रामवीर सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महेश वर्मा, अमित यादव, दीपक शर्मा, रौनक हलवान, प्रताप सिंह, अनिल डागर चनाना, महेश सोमरा, पंकज ओला, मनोज मोदी और दिनेश सोनी सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी भागीदारी निभाई। न्यायिक एवं बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में पक्षकारों के मामलों पर सुनवाई की गई।
प्री-लिटिगेशन लोक अदालत से मिलती है त्वरित राहत
प्री-लिटिगेशन विशेष लोक अदालत के माध्यम से बैंक ऋण मामलों, बकाया लोन, एनपीए खातों और वित्तीय विवादों का समाधान आपसी सहमति से कराया जाता है। इससे पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलती है।
इस प्रकार की लोक अदालतें न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करती हैं और विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान प्रदान करती हैं।
बैंक ऋण विवादों के समाधान पर विशेष जोर
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईडीबीआई बैंक के लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर सुना गया। बैंक अधिकारियों ने बकाया राशि, समझौता प्रस्ताव और भुगतान विकल्पों की जानकारी दी, जबकि पक्षकारों को मौके पर ही समझौते का अवसर प्रदान किया गया।





