चिड़ावा: मकर संक्रांति से पहले शहर के बाजारों में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री तेजी से बढ़ गई है। जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की समझाइश व स्पष्ट निर्देशों के बाद भी कई दुकानों पर यह धातु निर्मित मांझा खुलेआम बेचा जा रहा है, जिससे आमजन, पशु-पक्षी और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
प्रशासनिक प्रतिबंध के बाद भी बाजार में चाइनीज मांझा उपलब्ध
झुंझुनूं जिला प्रशासन द्वारा पिछले सप्ताह मुख्यालय स्तर पर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद चिड़ावा कस्बे में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय दुकानों पर मांझा बंडलों की बिक्री बदस्तूर जारी है और लोग जोखिम से अनजान होकर इसकी खरीद कर रहे हैं। कई नागरिकों ने यह शिकायत भी जताई है कि धातु मिश्रित मांझे से पक्षियों और राहगीरों के घायल होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
एसडीएम की अध्यक्षता में हुई थी बैठक, व्यापारियों को मिले थे स्पष्ट निर्देश
चिड़ावा उपखंड अधिकारी नरेश सोनी की अध्यक्षता में 5 जनवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में नगर पालिका क्षेत्र के दुकान संचालकों को साफ निर्देश दिए गए कि वे प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह बंद करें। सोनी ने कहा था कि यह मांझा गले में कटाव, बिजली लाइन शॉर्ट-सर्किट और सड़क दुर्घटनाओं जैसे खतरनाक हादसों का कारण बन सकता है।
व्यापारियों ने वादा किया, पर जमीन पर नहीं दिखा असर
बैठक में उपस्थित व्यापारियों ने प्रशासन के आदेशों का पालन करने का आश्वासन दिया था। कार्यकारी अधिशाषी अधिकारी सुनील कुमार सैनी और नगरपालिका फायर प्रभारी दीपक जांगिड़ सहित वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। अधिकारियों ने दुकानदारों को समाज के हित को प्राथमिकता देने और किसी भी अवैध बिक्री की सूचना तुरंत प्रशासन को देने का आग्रह किया था।
हालांकि क्षेत्र में निरंतर निगरानी की घोषणा के बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया, जिसके चलते बाजार में यह जानलेवा धागा आसानी से उपलब्ध है।
लोग डरे, प्रशासन पर सवाल
जैसे-जैसे मकर संक्रांति करीब आ रही है, पतंगबाजी का शौक बढ़ रहा है और धातु मिश्रित मांझा बेचने वाले विक्रेताओं की कमाई भी तेजी पकड़ रही है। आमजन का कहना है कि जागरूकता और चेतावनी तब तक बेकार है जब तक प्रशासन बाजार में उतरकर सक्रिय रूप से अभियान नहीं चलाता।
कई नागरिकों के अनुसार इस मांझे से न केवल पशु पक्षियों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि दोपहिया वाहन चालक भी अक्सर गर्दन और चेहरे पर कटाव की घटनाओं का शिकार होते रहे हैं।





