चिड़ावा: उप जिला अस्पताल में पत्रकारों और चिकित्सकों के बीच हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पत्रकारों ने झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक व उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच, एकतरफा एफआईआर वापस लेने और दोषी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
चिड़ावा उप जिला अस्पताल में यू-ट्यूब चैनल से जुड़े पत्रकारों और डॉक्टरों के बीच हुए विवाद ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। पत्रकारों का कहना है कि वे अस्पताल में मरीजों को होने वाली दिक्कतों को रिकॉर्ड कर प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें रोककर मारपीट की। मारपीट के बाद चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार का दबाव बनाते हुए दो पत्रकारों के खिलाफ एकतरफा एफआईआर दर्ज करवाई, जबकि पत्रकारों की ओर से भी चिकित्सक के खिलाफ शिकायत दी गई थी।
घटना के बाद झुंझुनूं के कई पत्रकार और यूट्यूबर एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक व उपखंड अधिकारी चिड़ावा के पास पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की। ज्ञापन देने पहुंचे समूह में बजरंग बराला, देव थालौर, अशोक तंवर, पुरुषोत्तम यादव, आशीष चाहर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजगुरु, जलेसिंह नेहरा, रवि शर्मा, विजेश स्वामी, सोनू पूनिया, राकेश चौधरी, सचिन सैनी, आशु स्वामी और सुनील चाहर शामिल थे, जिन्होंने घटना को पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
पत्रकारों ने मांग-पत्र में स्पष्ट किया कि अस्पताल के पीआरओ द्वारा दी गई गलत जानकारी कि वे पत्रकार नहीं हैं, भ्रामक है, क्योंकि यूट्यूब चैनल आरएनआई पंजीकृत हैं। पत्रकारों ने कहा कि लेबर रूम और आईसीयू के सीसीटीवी फुटेज को जांच का हिस्सा बनाया जाए और उप जिला अस्पताल के सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग पुलिस के कब्जे में ली जाए।
पत्रकारों ने कहा कि एफआईआर सिर्फ पत्रकारों पर दर्ज करना एकतरफा निर्णय है, इसलिए मारपीट में शामिल डॉक्टरों पर भी केस दर्ज किया जाए। उन्होंने शनिवार शाम तक जांच पूरी करके रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी रखी ताकि मामला पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ सके।




