नई दिल्ली: भारत में MCX पर चांदी का मार्च वायदा ₹13,550 या करीब 5% से अधिक बढ़कर ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जबकि सोने का फरवरी वायदा करीब ₹3,000 या लगभग 2% की वृद्धि के साथ ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड भाव पर कारोबार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर टैरिफ धमकी से बढ़ा जियो-पॉलिटिकल जोखिम निवेशकों को सेफ-हेवन एसेट्स की ओर आकर्षित कर रहा है, जिसका असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर देखा जा रहा है।
चांदी की रिकॉर्ड तेजी के क्या है कारण?
MCX पर चांदी की रफ्तार न सिर्फ स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी बढ़ी है, जहाँ सिंगापुर में स्पॉट गोल्ड 1.6% ऊपर 4,668.76 डॉलर/औंस तक पहुंचा और चांदी 3.2% बढ़कर 93.0211 डॉलर/औंस के स्तर पर पहुंची, साथ ही 94.12 डॉलर के शिखर को भी छुआ गया। Bloomberg के अनुसार यह तेजी ट्रेड वॉर की आशंका और वैश्विक जोखिम की वजह से सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर धन का पलायन है।
विशेषज्ञों की राय: रुझान और सपोर्ट-रेज
एनरिच मनीके के सीईओ पॉनमुदि आर के मुताबिक, COMEX पर चांदी 93.7 डॉलर के शीर्ष स्तर को छूने के बाद 89-90 डॉलर के क्षेत्र में सुधार दिखा, जो कि शॉर्ट-टर्म प्रोफिट बुकिंग को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गिरावट ट्रेंड में बदलाव नहीं बल्कि एक तकनीकी सुधार है। पॉनमुदि ने कहा कि MCX पर चांदी का भाव कंसॉलिडेशन के बाद भी तेजी वाले चैनल स्ट्रक्चर का सम्मान कर रहा है। उनके अनुसार ₹2,83,000-2,80,000 का क्षेत्र मजबूत समर्थन के रूप में काम करता है, जबकि ₹2,95,000 से ऊपर स्थिर चाल भाव को ₹3,05,000-₹3,20,000 तक तेजी से ले जा सकती है।
सेबी-पंजीकृत कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने तकनीकी विश्लेषण में कहा कि चांदी ने 93 डॉलर/औंस के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट दिखाया है। उन्होंने आगे बताया कि यदि यह स्तर कुछ और घंटों तक स्थिर रहे, तो निकट अवधि में यह 95 डॉलर और बाद में 100 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकती है।
ट्रेंड की बड़ी वजहें: आपूर्ति, औद्योगिक मांग और ट्रेड तनाव
पिछले साल चांदी ने सोने को पीछे छोड़ते हुए अक्टूबर में शॉर्ट स्क्वीज और लंदन में सप्लाई की लगातार कमी के चलते लगभग 150% की वृद्धि दर्ज की थी। इस बार भी ट्रेडर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे चांदी पर संभावित टैरिफ लगने की आशंका बनी है। संभावित टैक्स को लेकर चिंता ने अमेरिकी वेयरहाउस में धातु को रोक दिया है, जिससे वैश्विक इन्वेंटरी कम होने का दबाव और मजबूत हुआ है।
लेकिन चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से नहीं है, बल्कि औद्योगिक मांग की मजबूती और सीमित सप्लाई भी इसका बड़ा कारण है। चांदी सिर्फ गहनों या सिक्कों में उपयोग नहीं होती; यह इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा (सोलर पैनल फोटोवोल्टिक सेल), ऑटो उद्योग, चिकित्सा उपकरण, बैटरियों और पेट्रोकेमिकल अनुप्रयोगों में भी व्यापक रूप से इस्तेमाल होती है।
चांदी के कई गुण इसे अलग बनाते हैं: यह उच्च श्रेणी की विद्युत और ताप सुचालक है, एंटी-बैक्टीरियल और गैर-विषाक्त है, तथा इसके औद्योगिक उपयोग इतने व्यापक हैं कि इसका उत्पादन तेजी से औद्योगिक खपत में चला जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इसका उपयोग स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, कंप्यूटर और टीवी सर्किट बोर्ड तथा कनेक्टर में होता है, और वैश्विक AI व सौर ऊर्जा उद्योगों की बढ़ती मांग आगे भी चांदी की कीमतों को समर्थन दे सकती है।
सोने का भी रिकॉर्ड प्रदर्शन
सोने के भाव में बढ़ोतरी भी जारी है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना भी रिकॉर्ड स्तरों पर नजर आ रहा है। जोखिम भरे जियो-पॉलिटिकल माहौल के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में चुन रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें भी मजबूती से ऊपर जा रही हैं।
निष्कर्ष: कमजोर सप्लाई, बढ़ती मांग और वैश्विक तनाव
चांदी और सोने दोनों की कीमतों में यह मजबूती सिर्फ एक ट्रेंडिंग मूव नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक जोखिम, औद्योगिक मांग की मजबूती, सप्लाई की कमी, और तकनीकी ब्रेकआउट की वजह से यह एक ठोस रैली के रूप में उभर रही है। निवेशकों को आने वाले दिनों में वैश्विक ट्रेड नीतियों, भारतीय कमोडिटी बाजार की प्रतिक्रिया, और औद्योगिक मांग के रुझानों पर नजर रखी जानी चाहिए।





