पिलानी: कस्बे के राजकीय अस्पताल में कार्यरत एलर्जी स्पेशलिस्ट और तेजी से उभरते शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विकास कुमार बड़सरा ने नेशनल पेडिकॉन 2026, कोलकाता में एटोपिक डर्मेटाइटिस और स्किन एलर्जी पर अपना विशिष्ट व्याख्यान पेश किया। देशभर से आए बाल रोग विशेषज्ञों के बीच शेखावाटी क्षेत्र के इस डॉक्टर ने बच्चों में बढ़ती एलर्जी, आधुनिक इलाज, बायोलॉजिक्स और प्रिवेंशन तकनीकों पर ऐसा शोध आधारित प्रस्तुतीकरण दिया जिसने सम्मेलन में मौजूद चिकित्सकों को प्रभावित किया।
एटोपिक डर्मेटाइटिस और बच्चों में एलर्जी का बढ़ता खतरा
नेशनल स्तर के इस सम्मेलन में पिलानी के डॉक्टर विकास कुमार बड़सरा ने बताया कि एटोपिक डर्मेटाइटिस के साथ फूड एलर्जी, एलर्जिक राइनाइटिस और अस्थमा जैसी समस्याएँ बच्चों में तेजी से बढ़ रही हैं। उनके अनुसार बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन और धूल-प्रदूषण इन बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
आधुनिक जांच तकनीक और बायोलॉजिक्स बने समाधान
व्याख्यान के दौरान डॉक्टर बड़सरा ने कहा कि आज बच्चों में एलर्जी का सही और जल्दी निदान अत्यंत जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि एडवांस्ड डायग्नोसिस, स्किन प्रिक टेस्ट, और बायोलॉजिकल थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार बच्चों के लिए बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पैरेंट्स काउंसलिंग, जीवनशैली में सुधार और ट्रिगर्स से बचाव उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सम्मेलन में डॉक्टर बड़सरा की प्रस्तुति को मिली सराहना
कॉलकत्ता में हुए इस बाल रोग सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों व मेडिकल विद्यार्थियों ने डॉक्टर विकास बड़सरा की प्रस्तुति को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। आयोजन समिति ने मंच पर उनका आभार जताते हुए बाल स्वास्थ्य अनुसंधान में उनके योगदान को सराहा।
शेखावाटी क्षेत्र के लिए गौरव
डॉक्टर बड़सरा ने कहा कि एटोपिक डर्मेटाइटिस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं और विशेषज्ञता आधारित प्रबंधन जरूरी है। यह भी उल्लेखनीय है कि वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय एलर्जी सम्मेलन में अपना शोध प्रस्तुत कर चुके हैं, जिससे शेखावाटी क्षेत्र की चिकित्सा प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच मिला है।





