चिड़ावा: अखिल भारतीय प्रगतिशील किसान यूनियन के बैनर तले वंचित किसानों को फसल खराबे का मुआवजा दिलाने की मांग तेज हो गई है। चौधरी रंग लाल लमोरिया के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड कार्यालय चिड़ावा पहुंचकर एसडीएम डॉ. नरेश सोनी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने वर्षों से लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन से तत्काल न्याय की मांग की।
कई वर्षों का फसल खराबा, लेकिन मुआवजा अधूरा
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2022-23, 2024-25 तथा शीत लहर के कारण हुई फसल खराबे का मुआवजा कुछ किसानों को तो मिल गया, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अब भी इससे वंचित हैं। किसानों का कहना है कि समान परिस्थितियों में फसल नष्ट होने के बावजूद सभी किसानों को राहत नहीं मिलना गंभीर अन्याय है। शेष किसानों का दोबारा सर्वे कराकर उन्हें भी मुआवजा दिलाया जाए, ताकि उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई हो सके।
खरीफ 2025-26 में मूंग-मोठ खराबा, फिर भी चिड़ावा बाहर
किसानों ने खरीफ फसल 2025-26 का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि मूंग और मोठ की फसल खराबे का उल्लेख गिरदावरी में दर्ज है, इसके बावजूद चिड़ावा तहसील का एक भी गांव खराबे की सूची में शामिल नहीं किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि चिड़ावा तहसील को भी आधिकारिक रूप से खराबे की सूची में सम्मिलित किया जाए, जिससे किसानों को मुआवजा मिल सके और उन्हें न्याय का एहसास हो।
‘किसान खुशहाल होगा तो देश आगे बढ़ेगा’
किसानों ने कहा कि खेती ही देश की रीढ़ है और जब किसान आर्थिक संकट से जूझता है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। उनका तर्क था कि जब किसान का चेहरा खिलेगा, तभी देश खुशहाल होगा। प्रशासन से अपेक्षा जताई गई कि किसानों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
ज्ञापन सौंपते समय ये किसान रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान महेंद्र काजला, सज्जन लामोरिया, विजेंद्र नूनिया, बाल किशन कटेवा, राजवीर नूनिया, सुनील पूनिया, सुमेर धायल और आरसी कटेवा सहित अन्य किसान उपखंड कार्यालय परिसर में उपस्थित रहे और अपनी मांगों को एकजुट होकर रखा।





