नई दिल्ली: इंदौर वनडे में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर इतिहास रच दिया। कीवी टीम ने पहली बार भारतीय सरजमीं पर वनडे सीरीज जीत दर्ज की। विराट कोहली की 124 रन की दमदार पारी भी हार नहीं टाल सकी, जबकि नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा ने मैच में जान डालने की कोशिश की। शीर्ष क्रम और अनुभवी बल्लेबाजों की विफलता टीम इंडिया के लिए निर्णायक साबित हुई।
न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में ODI सीरीज जीती
इंदौर में खेले गए निर्णायक वनडे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 337 रन बनाए और फिर भारतीय टीम को 296 रनों पर रोककर ऐतिहासिक रिकॉर्ड हासिल किया। यह जीत कीवी टीम के लिए यादगार रही, क्योंकि इससे पहले वह भारतीय धरती पर कभी किसी वनडे सीरीज पर कब्जा नहीं कर सकी थी।
भारतीय शीर्ष क्रम ढहा, कोहली अकेले लड़े
रोहित शर्मा शुरुआत में सिर्फ ग्यारह रन बनाकर आउट हुए और उनके बाद शुभमन गिल तेईस रन पर पवेलियन लौट गए। श्रेयस अय्यर तीसरे नंबर पर आते हुए केवल तीन रन बनाकर क्रिस क्लार्क की गेंद पर कैच दे बैठे, जबकि अनुभवी केएल राहुल ने छह गेंदों में केवल एक रन का योगदान किया और ग्लेन फिलिप्स को आसान कैच थमाकर चलते बने।
नितीश कुमार रेड्डी ने दिखाई मैच समझ
जब भारत पर दबाव बढ़ चुका था, तब नितीश कुमार रेड्डी ने विराट कोहली का साथ निभाते हुए पारी को संभाला। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 88 रन जोड़कर मैच को मोड़ने की कोशिश की। रेड्डी ने धैर्य और आक्रामकता के साथ तिरपन रनों की पारी खेली, लेकिन उनके आउट होने के बाद टीम का संतुलन बिगड़ गया।
रवींद्र जडेजा की गैर-जरूरी शॉट खेलकर विदाई
अनुभवी रवींद्र जडेजा से उम्मीद थी कि वह नितीश के बाद टीम का भार संभालेंगे, लेकिन ऐसी उम्मीद पर पानी फिर गया। जडेजा ने जैडन लेनोक्स की गेंद पर आगे बढ़कर शॉट खेला और विल यंग ने बाउंड्री लाइन पर आसान कैच पकड़कर उनका अंत कर दिया। जडेजा ने सोलह गेंदों में केवल बारह रन बनाए।
हर्षित राणा ने मैच बचाने कि की भरपूर कोशिश
जडेजा के आउट होने के बाद भारत की जीत की संभावना लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन हर्षित राणा उठे और उन्होंने तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया। कोहली के साथ और नीचे के बल्लेबाजों के साथ भी उन्होंने रन जोड़े, लेकिन लगातार गिरते विकेटों ने स्कोर को आगे नहीं बढ़ने दिया।
विराट कोहली की शतकीय पारी हार में तब्दील
विराट कोहली ने एक बार फिर साबित किया कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। उन्होंने 108 गेंदों में 124 रन बनाए जिसमें दस चौके और तीन छक्के शामिल थे। अंत तक डटकर खेलने के बावजूद टीम की हार रोकना उनके अकेले के बस में नहीं था।





