सूरजगढ़: आशा सहयोगिनी यूनियन (सीटू) ने क्षेत्र में कार्यरत आशा सहयोगिनों ने मानदेय बढ़ोतरी, सामाजिक सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं, लेकिन उन्हें कार्य के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
आशा सहयोगिनों की ओर से यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार जयपुर के नाम सूरजगढ़ के उपखंड अधिकारी और उपखंड चिकित्सा अधिकारी को सौंपा गया है। ज्ञापन में कहा गया कि आशा कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य विभाग का अधिकांश फील्ड वर्क कराया जाता है, लेकिन उन्हें उचित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रहीं, जिससे उनका आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि आशा सहयोगिनों का न्यूनतम मानदेय बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए और हर वर्ष महंगाई भत्ते के अनुरूप मानदेय में वृद्धि सुनिश्चित की जाए। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान मानदेय उनके कार्यभार और जिम्मेदारियों के मुकाबले बेहद कम है।
आशा सहयोगिनों ने सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई है, ताकि उन्हें भी राज्य कर्मचारियों की तरह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा देने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि आशा सहयोगिनों को लगातार नए-नए ऑनलाइन और डिजिटल कार्य सौंपे जा रहे हैं, लेकिन उनके पास आवश्यक डिजिटल संसाधन नहीं हैं। इसलिए टैबलेट या लैपटॉप उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है, ताकि कार्य अधिक प्रभावी और सरल हो सके।
आशा सहयोगिनों ने महिला पर्यवेक्षक, आशा सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता और एएनएम की भर्ती प्रक्रिया में उन्हें आरक्षण का लाभ देने और आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों के अनुभव के बावजूद उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते।
आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि उन्हें राजपत्रित अवकाशों का लाभ दिया जाए, ताकि वे अपने परिवार और निजी जीवन के लिए समय निकाल सकें। इसके अलावा उन्होंने यह आग्रह किया कि उनसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त अन्य अनावश्यक कार्य न करवाए जाएं और उन्हें उनके मूल दायित्वों तक ही सीमित रखा जाए।
अंत में आशा सहयोगिनों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य वातावरण में स्वास्थ्य सेवाएं जारी रख सकें।
ज्ञापन सौंपने वालों में सरिता, सुनीता, माया, अनिता, सुशीला, उर्मिला, सुनीता, सुमन, सरोज, किरण, सावित्री, मंजू, विनोद, आशा, बबीता, सुमन, रतनी, रेशमा, पिंकी, अभिलाषा आदि शामिल रहे।





