नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ऑनलाइन बेटिंग और अवैध गैंबलिंग के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए 242 वेबसाइट लिंक ब्लॉक कर दिए। सरकारी सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद अभियान तेज हो गया है और अब तक 7,800 से ज़्यादा अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म बंद किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई युवाओं को फाइनेंशियल फ्रॉड, ऑनलाइन लत और साइबर अपराध के खतरे से बचाने के लिए की जा रही है।
ऑनलाइन गेमिंग एक्ट के बाद तेज़ हुई कार्रवाई
सरकारी अधिकारियों के अनुसार अगस्त 2025 में संसद के दोनों सदनों से पारित ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल को मंजूरी मिलने के बाद यह कार्रवाई तेज हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के साथ कानून लागू हुआ और 1 अक्टूबर को नियम प्रभावी हो गए। इन प्रावधानों के बाद सरकार लगातार ऐसे प्लेटफॉर्म ट्रैक कर रही है जो भारत में अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं।
किन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई, किसे मिलेगी सज़ा?
अधिकारियों ने बताया कि कानून के तहत ऑनलाइन पैसे वाले गेम खेलने वाले व्यक्तियों पर सज़ा नहीं होगी। इसके बजाय उन कंपनियों, एडवरटाइज़र, प्रमोटर और फाइनेंसर पर कार्रवाई होगी जो इस तरह के गैंबलिंग प्लेटफॉर्म चलाते या प्रमोट करते हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को जोखिम से बचाने के साथ आर्थिक नुकसान और लत से जुड़े सामाजिक प्रभावों को रोकना है।
युवाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख
सरकारी सूत्रों ने कहा कि 242 लिंक ब्लॉक करने की ताज़ा कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार डिजिटल अपराधों और अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क को खत्म करने के लिए गंभीर है। ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े वित्तीय घोटाले, फर्जीवाड़े और साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा, गैंबलिंग पर रोक
सरकार के मुताबिक यह कानून सामाजिक और कौशल आधारित ऑनलाइन गेम को मजबूत करने तथा ई-स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को अवसर देने के लिए बनाया गया है। वहीं, पैसे की ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े खतरनाक गेमिंग, उनके विज्ञापन और फाइनेंसिंग पर सख्त रोक जारी रहेगी।





