झुंझुनूं: आयुर्वेद चिकित्सा ने एक बार फिर अपनी प्रभावशीलता और विश्वसनीयता सिद्ध की है। जिला प्रशासन और आयुर्वेद विभाग झुंझुनूं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का बुधवार को भव्य एवं भावनात्मक माहौल में समापन हुआ। शिविर के दौरान हजारों रोगियों को आयुर्वेद की आधुनिक एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से राहत मिली, जिससे यह आयोजन राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
जिला प्रशासन और आयुर्वेद विभाग झुंझुनूं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का समापन समारोह महामण्डलेश्वर डॉ. अर्जुनदास महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। समारोह में राष्ट्रीय आयुष मिशन के परियोजना निदेशक डॉ. दिनेश शर्मा मुख्य अतिथि तथा पूर्व विशेषाधिकारी आयुर्वेद विभाग डॉ. मनोहर पारीक समारोहाध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने शिविर की व्यवस्थाओं, अनुशासन और चिकित्सकीय गुणवत्ता की सराहना की।
उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग डॉ. जितेन्द्र स्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर के दौरान कुल 7,288 नवीन रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सा से लाभान्वित किया गया। इनमें क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा के माध्यम से 103 सफल ऑपरेशन किए गए, जबकि अग्निकर्म, पंचकर्म, विटुकर्म, सामान्य ओपीडी और योग व स्वस्थ जीवनशैली परामर्श के जरिए हजारों रोगियों को राहत मिली। भर्ती किए गए 125 रोगियों में से अधिकांश का सफल उपचार शिविर के दौरान किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश शर्मा ने शिविर की सफलता का श्रेय जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग को देते हुए कहा कि शिविर से पूर्व की गई व्यापक जनजागरूकता, शिविर के दौरान गुणवत्ता परीक्षण के लिए किए गए निरीक्षण और रोगियों से सीधा संवाद इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में निर्णायक साबित हुए। उन्होंने इसे आयुर्वेद विभाग राजस्थान के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।

समारोहाध्यक्ष डॉ. मनोहर पारीक ने बताया कि एनआरडीडी अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप ढूकिया द्वारा उपलब्ध कराए गए 150 बेड, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, पंचकर्म थैरेपी कक्ष, स्वच्छता और आवास की समुचित व्यवस्थाएं भामाशाह सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण रहीं। इन सुविधाओं ने रोगियों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया।
शिविर के समापन अवसर पर रोगियों द्वारा दिया गया फीडबैक अत्यंत भावुक रहा। रोगियों ने आयुर्वेद विभाग, भामाशाह परिवार और चिकित्सा स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयुर्वेद चिकित्सा शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि आमजन को सुलभ और सुरक्षित उपचार मिल सके।
शिविर की सफलता के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में भामाशाह दम्पति डॉ. संदीप ढूकिया और डॉ. सुनीता ढूकिया को शाल, साफा और चुनरी भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही आयुर्वेद विभाग के 60 कार्मिकों और संस्थान से जुड़े 80 स्वयंसेवकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके योगदान को सराहा गया।
शिविर के सफल संचालन में डॉ. महेश माटोलिया, सर्जन डॉ. सुनील कानोडिया, डॉ. भागीरथ गढ़वाल, डॉ. ओमप्रकाश चेचू, डॉ. पूनम, डॉ. प्रीति स्वामी, डॉ. दीपक बगड़िया, डॉ. नवीन, डॉ. विकास, डॉ. सुनील, नथमल स्वामी, नर्स सुनीला और रीटा, परिचारक पूरणमल, कुलदीप, मदन और देवकरण सहित समस्त स्टाफ का योगदान उल्लेखनीय रहा।





