सूरजगढ़: ब्लॉक के अगवाना खुर्द सरकारी स्कूल में भूगोल व्याख्याता अनिल कुमार के ट्रांसफर ने शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में ला दिया है। बोर्ड परीक्षा सिर पर है, लेकिन विद्यार्थी और ग्रामीण सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ पाँच दिनों से कड़कड़ाती सर्दी में धरना देकर बदलाव रद्द करने पर अडिग हैं। विरोध अब भूख हड़ताल की चेतावनी तक पहुँच चुका है।
विरोध में कड़ाके की सर्दी भी नहीं तोड़ सकी हिम्मत
बुधवार को भी अगवाना खुर्द स्कूल परिसर के बाहर छात्र सुबह से धरने पर बैठे दिखाई दिए। प्रधानाचार्य अधिकार के अवकाश के बावजूद भी धरना बदस्तूर जारी रहा। ग्रामीणों ने माना कि यह विरोध सिर्फ शिक्षक का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य, सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बोर्ड परीक्षा की तैयारी का सवाल है।
रविवार से शुरू हुआ विरोध आंदोलन हुआ और तेज
अनिल कुमार के स्थानांतरण के आदेश के बाद ग्रामीणों ने रविवार की छुट्टी के दिन ही स्कूल के बाहर डेरा डाल दिया। सोमवार तक धरना बढ़ा और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी आंदोलन में शामिल हो गए। विरोध ने सोशल मीडिया पर भी तेज पकड़ बनाई और स्कूल स्तर का मुद्दा अब प्रशासन तक पहुँच चुका है।
प्रशासन ने बात की, लेकिन समाधान नहीं निकला
सोमवार को मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बसंता देवी के साथ अधिकारियों अनिल शर्मा, प्रधानाचार्या सैनिकोर और पंचायत के प्रतिनिधि चरणसिंह लुणायच मौके पर पहुंचे। टीम ने कई घंटे समझाइश दी, लेकिन बातचीत परिणामहीन रही और अधिकारी लौटना पड़ा।
मंगलवार को नए भूगोल शिक्षक अक्षय जैसे ही स्कूल पहुँचे, माहौल तनावपूर्ण हो गया। विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने उन्हें क्लास ज्वाइन नहीं करने दिया। प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में भी विरोधकारियों ने रुख नहीं बदला।
SDM दीपक चंदन से भी हुई मुलाकात
मंगलवार शाम सूरजगढ़ एसडीएम दीपक चंदन धरना स्थल पहुँचकर विद्यार्थियों को समझाने पहुंचे। उन्होंने बोर्ड परीक्षा और पढ़ाई पर सीधा असर होने का तर्क रखा लेकिन छात्र सहमत नहीं हुए। बुधवार को छात्रों का प्रतिनिधि दल SDM से मिला और ज्ञापन सौंप कर मांग तत्काल जिला कलेक्टर तक पहुंचाने को कहा।
भूख हड़ताल की चेतावनी, अभिभावकों पर दबाव का आरोप
विद्यार्थियों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि भूगोल व्याख्याता अनिल कुमार का ट्रांसफर राजनीतिक दबाव और द्वेषभावना में किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानांतरण रद्द नहीं होता, तो वे गुरुवार से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
धरने में शामिल बच्चों का दावा है कि अभिभावकों को समझाइश देकर आंदोलन से रोकने की कोशिश हो रही है, जबकि वे अपनी मर्जी से विरोध कर रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल—बोर्ड परीक्षा से पहले शिक्षक क्यों हटाया?
अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि परीक्षा के ठीक पहले शिक्षक बदलना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार एक तरफ सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार की योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों की आवाज अनसुनी की जा रही है।
स्कूल का माहौल ठप, पढ़ाई बाधित
धरने के कारण भूगोल की पढ़ाई पूरी तरह रुक गई है। स्कूल स्टाफ कक्षाओं से दूर परिसर में खाली समय काटने को मजबूर है। चार दिन का यह शैक्षणिक नुकसान छात्रों के परिणामों पर भारी पड़ सकता है। ग्रामीणों समेत आंदोलनकारी छात्रों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर समाधान निकालेगा।





