सुलताना: कस्बे में आरटीआई कार्यकर्ता पर हमला होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जोहड़ अतिक्रमण हटाने और चारागाह भूमि संरक्षण से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह शेखावत के साथ कथित रूप से जानलेवा मारपीट की गई। इस घटना ने एक बार फिर RTI एक्टिविस्ट सुरक्षा, नगर पालिका भ्रष्टाचार और अवैध अतिक्रमण जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित जितेंद्र सिंह शेखावत सुलताना कस्बे के निवासी हैं और लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने आमजन की सुविधा के लिए जोहड़ भूमि, चारागाह, और सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण के खिलाफ माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में रिट याचिकाएं और पीआईएल दायर की थीं। न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश भी पारित किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अवमानना याचिका भी दाखिल कर रखी है।
आरोप: हाईकोर्ट याचिका बनी हमले की वजह
रिपोर्ट में बताया गया है कि न्यायालयीन कार्रवाई के चलते सुलताना नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन घीसाराम चावरिया उससे रंजिश रखने लगे। आरोप है कि घीसाराम चावरिया ने जोहड़ भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर निर्माण कर रखा है। इसी द्वेष के चलते घीसाराम चावरिया ने अपने पुत्र रविंद्र, सूरज और अन्य लोगों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा।
बस स्टैंड जाते समय किया हमला
घटना गुरुवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है। जब जितेंद्र सिंह शेखावत अपने घर से बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी हरिनारायण अस्पताल के पास आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि लाठी-डंडों से हमला करते हुए गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। हमले में पीड़ित को अंदरूनी चोटें आईं और वह बाल-बाल बच पाया।
“जान से मार सकते थे” – पीड़ित
पीड़ित जितेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि हमला बेहद सुनियोजित था और यदि समय पर लोग नहीं पहुंचते तो उसकी जान भी जा सकती थी। हमलावरों की मंशा स्पष्ट रूप से जानलेवा थी।
थाने में रिपोर्ट, सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद जितेंद्र सिंह शेखावत ने सुलताना थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जिसमें घीसाराम चावरिया, रविंद्र, सूरज और अन्य आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
गंभीर सवाल
यह मामला RTI कार्यकर्ता पर हमला, अवैध अतिक्रमण, और न्यायालय के आदेशों की अवहेलना जैसे मुद्दों को उजागर करता है। सवाल यह है कि जनहित में आवाज उठाने वालों की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी?





