चिड़ावा: राजस्थान में Raj-CES महाविद्यालयों की संविदा आधारित नियुक्ति व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 से कथित विचलन को लेकर विरोध तेज हो गया है। झुंझुनू जिले के चिडावा स्थित मास्टर हजारीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में प्राध्यापकों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि Raj-CES चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
महाविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण विरोध व नारेबाजी
मास्टर हजारीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय, चिडावा में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में महासंघ की महाविद्यालय इकाई से जुड़े प्राध्यापकों ने मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर तथा मांगों से जुड़े बैनर लेकर Raj-CES योजना के वर्तमान स्वरूप पर असहमति जताई। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और मर्यादित रहा, लेकिन संदेश स्पष्ट था कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Raj-CES योजना को बताया NEP-2020 की भावना के विपरीत
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) ने स्पष्ट किया कि Raj-CES महाविद्यालयों का मौजूदा ढांचा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के मूल उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है। महासंघ के अनुसार इन महाविद्यालयों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव, सीमित अधोसंरचना, संसाधनों की कमी और शोध व नवाचार के अवसर न होना, राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहा है। संविदा और अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित शिक्षण व्यवस्था से अकादमिक निरंतरता प्रभावित हो रही है।
374 Raj-CES कॉलेज, 260 में आज भी स्थायी संकाय नहीं
महासंघ ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के बीच Raj-CES योजना के तहत 303 नए महाविद्यालय खोले गए, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 और 2024-25 के दौरान 71 अतिरिक्त Raj-CES महाविद्यालय प्रारंभ किए गए। इस प्रकार कुल संख्या 374 हो चुकी है, लेकिन इनमें से लगभग 260 महाविद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
28,500 रुपये वेतन पर संविदा नियुक्तियों का विरोध
महासंघ ने भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के तहत Raj-CES नियम-2023 में प्रस्तावित बदलावों पर भी कड़ा ऐतराज जताया। संगठन का कहना है कि पांच वर्षों के लिए 28,500 रुपये के नियत वेतन पर संविदा टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है। महासंघ के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी, असुरक्षित और नीति-विरोधी है।

सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक लागू नहीं
प्रदर्शन के बाद महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी और जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम पृथक-पृथक ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव-2023 के बाद गठित राज्य सरकार द्वारा Raj-CES महाविद्यालयों और विषय संचालन के लिए गठित सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही लागू हुई हैं। चिडावा एसडीएम नरेश सोनी की अनुपस्थिति में ज्ञापन तहसीलदार रामकुमार पूनिया को सौंपा गया।
सरकार को चेतावनी: मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज
महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की कि Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं और संविदा नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। संगठन ने साफ किया कि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक और आंदोलनात्मक मार्ग अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इन प्राध्यापकों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी
इस विरोध प्रदर्शन में महाविद्यालय इकाई से जुड़ी इंद्रा सैनी, बाबूलाल वर्मा, परमानंद शर्मा और सोमवीर सक्रिय रूप से शामिल रहे, जबकि राजकीय कृषि महाविद्यालय से शिल्पा धानिया, लक्ष्मण सैनी और राजेंद्र पुनिया सहित अधिकारी-कर्मचारी साथी भी मौजूद रहे। जानकारी डॉ. अवतार कृष्ण शर्मा, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) द्वारा दी गई।





