चिड़ावा: नजदीकी गांव हीरवा में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए कुमावत, यादव, सैन और जांगिड़ समाज ने संयुक्त मुक्ति धाम का कायाकल्प किया। मात्र 10 दिनों में 2 लाख रुपये के जनसहयोग और युवाओं के श्रमदान से चारदीवारी, इंटरलॉक सड़क और टिनशेड का निर्माण पूरा किया गया। पढ़िए एकता की यह प्रेरक कहानी।
हीरवा गाँव ने सामूहिक शक्ति और सामाजिक एकता का ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसने पूरे क्षेत्र को अचंभित कर दिया है। यहाँ स्थित सर्वसमाज मुक्ति धाम, जो वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा था, उसे ग्रामीणों ने अपने दम पर मात्र 10 दिनों के भीतर पूरी तरह आधुनिक और व्यवस्थित बना दिया। कुमावत, यादव, सैन और जांगिड़ समाज के इस साझा प्रयास ने न केवल बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ किया है, बल्कि समाज के बीच भाईचारे के नए आयाम स्थापित किए हैं।
सामूहिक संकल्प से बदली मुक्ति धाम की तस्वीर
चिड़ावा के निकट हीरवा गाँव में कुमावत, यादव, सैन और जांगिड़ समाज के साझा मुक्ति धाम के विकास के लिए सभी समाजों ने हाथ मिलाया। शुरुआत में एकजुट होकर परिसर की चारदीवारी का निर्माण कराया गया और एक भव्य मुख्य द्वार स्थापित किया गया। इस कदम से न केवल परिसर सुरक्षित हुआ, बल्कि इसकी सुव्यवस्था भी सुनिश्चित हुई। संयुक्त प्रयासों की इस सफलता के बाद कुमावत समाज ने स्वेच्छा से आगे के विकास कार्यों की कमान संभाली और निर्माण को गति दी।
भीषण गर्मी और वर्षा से मिलेगी राहत, निर्मित हुआ टिनशेड
अंतिम संस्कार के समय परिजनों को होने वाली असुविधा को देखते हुए कुमावत समाज ने परिसर में विशाल टिनशेड का निर्माण कराया है। अब धूप और बारिश के दौरान लोगों को खुले में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। इसके साथ ही आवागमन को सुगम बनाने के लिए 10 फीट चौड़ी और लगभग 150 फीट लंबी इंटरलॉक सड़क बिछाई गई है। परिसर की व्यापक साफ-सफाई करवाकर इसे पूरी तरह स्वच्छ और गरिमापूर्ण बनाया गया है।
मात्र 10 दिन और 2 लाख का जनसहयोग
इस पूरे कायाकल्प की सबसे बड़ी विशेषता इसका समय प्रबंधन और बजट रहा। गाँव के मनिठिया परिवार के लगभग 250 घरों ने मिलकर करीब 2 लाख रुपये की सहयोग राशि जुटाई। युवाओं ने जोश दिखाते हुए दिन-रात श्रमदान किया, जिसके परिणामस्वरूप जो काम महीनों में पूरा होना था, वह मात्र 10 दिनों में संपन्न हो गया। समाज के वरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन में युवाओं की टोली ने इस असंभव से दिखने वाले लक्ष्य को हासिल कर दिखाया।
सामाजिक समरसता का नया अध्याय और भविष्य का संकल्प
निर्माण कार्य में विश्वा राम, ओंकारमल, जगदीश, नौरंग राम, मोहरसिंह, फूलसिंह, प्रकाश, मीनू, सुभाषसिंह, अशोक, राजेश, महेन्द्र, मुकेश, सुशील, सजय, विक्रम, विनोद और ईश्वर सहित मनिठिया समाज के तमाम लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्य पूर्ण होने पर सभी समाजों ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि वे प्रतिवर्ष कम से कम एक सामाजिक कार्य सामूहिक रूप से करेंगे। ग्रामीणों के अनुसार, यह पहल गाँव के विकास और आपसी सद्भाव की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।





