नई दिल्ली: कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी ने ऐसा झटका दिया कि निवेशक और ट्रेडर्स सकते में आ गए। MCX पर चांदी की कीमतों में इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 15% की भारी गिरावट दर्ज की गई और भाव 339,910 रुपये प्रति किलो तक फिसल गया। महज 24 घंटे पहले 4.20 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चांदी में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने सिल्वर प्राइस ट्रेंड, कमोडिटी मार्केट और बुलियन सेक्टर को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, इंट्राडे में दिखा फ्री-फॉल
शुक्रवार को MCX पर 5 मार्च एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स की शुरुआत 383,898 रुपये प्रति किलो पर हुई। शुरुआती कारोबार में चांदी में हल्की रिकवरी देखने को मिली और भाव 389,986 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए, लेकिन दोपहर बाद अचानक बाजार का रुख पलट गया। भारी बिकवाली के दबाव में चांदी के दाम करीब 15% टूटकर 339,910 रुपये प्रति किलो तक गिर गए। इसके साथ ही पूरे कमोडिटी मार्केट में कमजोरी देखने को मिली।
24 घंटे में तबाही: 1 लाख रुपये तक गिरा सिल्वर भाव
गुरुवार को MCX पर चांदी का भाव 4.20 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, जो अब तक का रिकॉर्ड हाई माना जा रहा है। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर चांदी की कीमतों में करीब 1 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को भारतीय बाजार बंद होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार Comex पर भी सिल्वर फ्यूचर में करीब 12% की तेज गिरावट देखने को मिली, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली से बदला ट्रेंड
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ सत्रों में चांदी ने तेज रैली दिखाई थी और तकनीकी तौर पर भाव ओवरबॉट जोन में पहुंच गए थे। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट में बताया गया है कि 4.20 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंचते ही बड़े निवेशकों और संस्थागत खिलाड़ियों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी का सपोर्ट नहीं मिलने से गिरावट और तेज हो गई।
लॉन्ग अनवाइंडिंग ने बढ़ाया दबाव
MCX के आंकड़ों के अनुसार चांदी में लॉन्ग अनवाइंडिंग साफ तौर पर देखने को मिली। कीमतों के गिरने के साथ ओपन इंटरेस्ट में भी कमी दर्ज की गई, जिससे संकेत मिला कि ऊंचे स्तरों पर लॉन्ग पोजीशन बनाने वाले ट्रेडर्स तेजी से बाहर निकले। इस तरह की लॉन्ग अनवाइंडिंग अक्सर बाजार में अचानक और तीखी गिरावट को जन्म देती है।
कमजोर ग्लोबल संकेतों से बढ़ी बिकवाली
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है, ऐसे में ग्लोबल ग्रोथ को लेकर बढ़ती चिंताओं ने इसमें बिकवाली को और तेज कर दिया। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिस्क-ऑफ माहौल बना, सिल्वर प्राइस पर दबाव साफ नजर आया।
मार्जिन कॉल और स्टॉप लॉस ट्रिगर से तेज गिरावट
तेज गिरावट के दौरान बड़ी संख्या में पोजीशनों पर स्टॉप लॉस ट्रिगर हुए। इसके साथ ही मार्जिन कॉल के दबाव में कई ट्रेडर्स को मजबूरी में बिकवाली करनी पड़ी। खासतौर पर इंट्राडे और हाई-लीवरेज पोजीशनों में यह दबाव ज्यादा देखने को मिला, जिससे गिरावट और गहरी हो गई।
तकनीकी सपोर्ट टूटते ही आई भारी स्लाइड
तकनीकी चार्ट पर 3.80 लाख और 3.65 लाख रुपये प्रति किलो के अहम सपोर्ट लेवल टूटते ही बाजार में सेलिंग का दबाव बढ़ गया। सपोर्ट ब्रेकडाउन के बाद एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और शॉर्ट-टर्म सिस्टम्स से भी बिकवाली के संकेत मिले, जिसके चलते चांदी के भाव सीधे 3.40 लाख रुपये के आसपास पहुंच गए।
फेड चेयर नियुक्ति की अटकलों से बुलियन मार्केट में तनाव
ग्लोबल बुलियन मार्केट में बढ़ते तनाव के पीछे अमेरिकी केंद्रीय बैंक यूएस फेड के चेयरपर्सन की संभावित नियुक्ति भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बाजार में चर्चा है कि डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व फेड चेयर रह चुके केविन वार्श को इस पद पर नियुक्त कर सकते हैं। केविन वार्श को हॉकिश मौद्रिक नीति का समर्थक माना जाता है, जिससे गोल्ड और सिल्वर दोनों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
आगे क्या? निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी में आई यह बड़ी गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि मुनाफावसूली, लॉन्ग अनवाइंडिंग, कमजोर वैश्विक संकेत और तकनीकी ब्रेकडाउन का संयुक्त परिणाम है। रिकॉर्ड तेजी के बाद इस तरह का करेक्शन बाजार की स्वाभाविक प्रक्रिया माना जा रहा है, लेकिन फिलहाल अस्थिरता ऊंची रह सकती है। लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और भाव के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है, जबकि ट्रेडर्स के लिए सख्त रिस्क मैनेजमेंट और मजबूत स्टॉप लॉस बेहद जरूरी बताया गया है।





