सूरजगढ़: कस्बे में रविवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर समिति द्वारा संचालित पुस्तकालय में किसानों के मसीहा कहे जाने वाले सर छोटूराम की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पुस्तकालय में मौजूद लोगों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर मोमबत्तियां जलाईं और भारतीय किसान आंदोलन, भूमि सुधार और मजदूर अधिकारों में उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में आए वक्ताओं ने सर छोटूराम के संघर्ष और ऐतिहासिक कानूनों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत बताई।
अंबेडकर समिति के कार्यक्रम में शिक्षाविद मोतीलाल डिग्रवाल ने कहा कि सर छोटूराम 1881 से 1945 तक ब्रिटिश भारत में पंजाब प्रांत के प्रभावशाली नेता रहे। उन्होंने किसानों और मजदूरों को साहूकारों के शोषण से मुक्त कराने के लिए कर्ज मुक्ति अधिनियम और भू-राजस्व सुधार जैसे ऐतिहासिक कानून बनवाए। छोटूराम द्वारा निकाले गए जाट गजट ने ग्रामीण समाज को जागरूक किया और यूनियनिस्ट पार्टी के माध्यम से संयुक्त शासन की नई दिशा दी।
पुण्यतिथि पर वक्ताओं ने बताया कि सर छोटूराम भाखड़ा नंगल बांध के जनक भी माने जाते हैं। उनका जन्म घड़ी संपला रोहतक में हुआ और परिवार में सबसे छोटे होने के चलते उनका नाम छोटूराम पड़ा। दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने आगरा कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। आरंभिक राजनीतिक जीवन में कांग्रेस से जुड़ने के बाद उन्होंने असहयोग आंदोलन में किसानों की अनदेखी होने पर पार्टी छोड़ दी।
अंबेडकर समिति के पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मैनेजर राधेश्याम चिरानिया, सामाजिक कार्यकर्ता छोटेलाल गजराज, पूर्व तहसीलदार महावीर प्रसाद बाकोलिया, ओमप्रकाश सेवदा और सज्जन कुमार कटारिया शामिल हुए। सभी ने सर छोटूराम के संघर्षों की विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की और ग्रामीण युवाओं को उनके योगदान से प्रेरणा लेने की सलाह दी।





