चिड़ावा: शहर में सामाजिक चेतना और नारी सशक्तिकरण का भावनात्मक संदेश उस समय देखने को मिला, जब अंतरराष्ट्रीय लेखक, पत्रकार-विचारक और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. शंभू पंवार ने अपनी पौत्री यशस्वी के जन्मदिन पर गौमाताओं की सेवा कर समाज को बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेटी के बिना परिवार ही नहीं, समाज भी अधूरा है।
बेटी समाज की नैतिक और सांस्कृतिक शक्ति — डॉ. शंभू पंवार
श्री कृष्ण गौशाला चिड़ावा में आयोजित इस कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. शंभू पंवार ने कहा कि बेटियाँ ईश्वर की कोमल नेमत हैं, जो परिवार में संवेदना, संस्कार और समृद्धि लेकर आती हैं। उन्होंने कहा कि जिस घर में बेटी होती है, वहाँ नैतिक मूल्यों का स्वतः विकास होता है और सामाजिक संतुलन बना रहता है।
शिक्षा से सशक्त होती हैं दो पीढ़ियाँ
डॉ. शंभू पंवार ने अपने संबोधन में कहा कि बेटी की शिक्षा केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दो पीढ़ियों को सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेटियाँ समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक बनती हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
हर क्षेत्र में बेटियों की सशक्त भागीदारी
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बेटियाँ शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, साहित्य, खेल, राजनीति और सामाजिक सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि बेटियों को आगे बढ़ने के समान अवसर दिए जाएं और सोच में बदलाव लाया जाए।
नारी सम्मान की शिक्षा बेटों को भी जरूरी
डॉ. पंवार ने यह भी रेखांकित किया कि आज के दौर में केवल बेटियों को ही नहीं, बल्कि बेटों को भी नारी सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक संस्कारों की शिक्षा देना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कार उपदेश से नहीं, बल्कि व्यवहार और आचरण से विकसित होते हैं।
गौसेवा के माध्यम से सामाजिक संदेश
डॉ. शंभू पंवार ने अपनी पौत्री यशस्वी के जन्मदिन पर श्री कृष्ण गौशाला चिड़ावा में गौमाताओं को गुड खिलाकर सेवा की। उल्लेखनीय है कि वे अपने परिवार के सदस्यों के जन्मदिन और माता-पिता की पुण्यतिथि पर भी नियमित रूप से गौसेवा करते हैं और समाज में सेवा, संवेदना और संस्कार का संदेश देते रहे हैं।
इस अवसर पर यशस्वी, यशु, सुभाष पंवार, अभिषेक पंवार और चंदन पंवार ने भी सेवा कार्य में सहभागिता निभाई।





