Wednesday, February 11, 2026
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गिरावड़ी में विकास बनाम आस्था की जंग, पावर ग्रिड लाइन पर भड़का ग्रामीण आक्रोश

उदयपुरवाटी: क्षेत्र का गिरावड़ी गांव इन दिनों पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के सवाल पर उबाल पर है। स्कीपर कंपनी द्वारा प्रस्तावित हाई टेंशन बिजली लाइन को लेकर ग्रामीणों का तीखा विरोध सामने आया है। आरोप है कि यह लाइन 500 साल पुरानी भैरूजी महाराज की पवित्र बणी को नुकसान पहुंचाते हुए निकाली जा रही है, जिससे हजारों पेड़ और वन्य जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

गिरावड़ी में पावर ग्रिड लाइन को लेकर क्यों भड़का विरोध?

ग्रामीणों का कहना है कि स्कीपर पावर ग्रिड परियोजना के तहत प्रस्तावित हाई टेंशन बिजली लाइन का कॉरिडोर सीधे उस पवित्र बणी से होकर गुजर रहा है, जिसे गांव की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र माना जाता है। यह बणी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां हजारों पेड़ और करीब 8 से 10 हजार पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी मौजूद है।

500 साल पुरानी भैरूजी महाराज की बणी पर संकट

ग्रामीणों के अनुसार, भैरूजी महाराज की यह बणी पिछले करीब पांच शताब्दियों से संरक्षित है और इसे कभी नुकसान नहीं पहुंचाया गया। प्रस्तावित बिजली लाइन के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र की हरियाली और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

कॉरिडोर बदलने की मांग, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन

गिरावड़ी के ग्रामीणों ने एक सुर में मांग की है कि हाई टेंशन लाइन का मार्ग बदला जाए और पवित्र बणी को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो खेजड़ली आंदोलन की तर्ज पर व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस चेतावनी के बाद प्रशासन और कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

गांव में तनावपूर्ण माहौल, प्रशासन की नजर

पावर ग्रिड परियोजना को लेकर गांव में फिलहाल तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण लगातार बैठकें कर रणनीति बना रहे हैं और सामाजिक संगठनों से समर्थन जुटाया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज

यह मामला एक बार फिर विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को सामने ले आया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन आस्था, प्रकृति और परंपरा की कीमत पर किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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