Sunday, August 31, 2025
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पिलानी में श्रम संहिताओं के खिलाफ प्रदर्शन, किसानों और युवाओं ने उठाई नहर, रोजगार व मनरेगा की मांग, संयुक्त किसान मोर्चा व सहयोगी संगठनों के आह्वान पर बस स्टैंड पर हुई विरोध सभा, सरकार की नीतियों के खिलाफ लगे नारे

पिलानी, 9 जुलाई: देशभर में केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में चल रही आम हड़ताल के तहत पिलानी में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित इस विरोध आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन मिला है। इसी क्रम में SKM से जुड़े प्रमुख संगठन ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (AIDYO) ने पिलानी के तालाब बस स्टैंड पर विरोध प्रदर्शन किया और जनसभा आयोजित की।

सभा को संबोधित करते हुए शंकर दहिया ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शेखावाटी अंचल के किसानों को नहर का पानी अविलंब उपलब्ध कराया जाए और पिलानी विधानसभा क्षेत्र को कुंभाराम लिफ्ट कैनाल परियोजना से जोड़ा जाए। उन्होंने रोजगार में ठेका प्रथा समाप्त करने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, और मनरेगा योजना में साल में 200 दिन का काम और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की।

वक्ता ने बिजली संशोधन विधेयक 2023 को तत्काल वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को बंद करने, और समाज में फैल रही अश्लीलता व नशाखोरी पर कड़े नियंत्रण की भी मांग की। विरोध सभा में इंदर सिंह झिरली, महादेवाराम जांगिड़, विष्णु वर्मा, नरेश वर्मा, अनवर अली भाटी, संदीप शर्मा, बजरंग आलडिया, राजेन्द्र सिहाग, पवन वर्मा, कैलाश भार्गव, महावीर प्रसाद शर्मा, नंदलाल सैनी और ओजस्वी राजू सैनी ने भी अपने विचार रखते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की और आंदोलन को तेज करने की बात कही।

सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “इंकलाब जिंदाबाद”, “मजदूर किसान एकता जिंदाबाद”, “चार मजदूर संहिता रद्द करो”, “बिजली बिल 2023 वापस लो” और “स्मार्ट मीटर बंद करो” जैसे नारों के साथ सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध जताया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक मजदूर, किसान और आम जनता के हितों की अनदेखी की जाती रहेगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

प्रदर्शन शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ, लेकिन इसकी गूंज सरकार तक पहुंचाने का संदेश स्पष्ट था। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी जनता के अधिकारों के लिए इसी तरह आवाज उठाई जाती रहेगी।

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