नई दिल्ली/जयपुर: दिल्ली और जयपुर के बीच की दूरी 300 किलोमीटर है, जिसे अब तक बस और ट्रेन से चार से पांच घंटे में तय किया जाता रहा है। लेकिन अब यह दूरी महज 30 मिनट में तय की जा सकेगी। इसका कारण है भारतीय रेलवे मंत्रालय द्वारा भारत के पहले हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक पर किए जा रहे काम। इस परियोजना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सहयोग से विकसित किया जा रहा है, जो 350 किलोमीटर तक की यात्रा को केवल 30 मिनट में पूरा करने की क्षमता रखता है। इससे यात्रियों को चार से पांच घंटे का लंबा समय बचाने का अवसर मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया खुलासा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “आईआईटी मद्रास में हाइपरलूप परियोजना। सरकार और अकादमिक क्षेत्र का सहयोग भविष्य के परिवहन के लिए नवोन्मेष कर रहा है।” उन्होंने बताया कि भारत के पहले 422 मीटर लंबी हाइपरलूप पॉड का परीक्षण किया गया है, लेकिन इस तकनीक के विकास के लिए अब भी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि आईआईटी मद्रास को अगले चरण के लिए एक मिलियन डॉलर का अनुदान मिलेगा, जिससे यह परियोजना और तेजी से आगे बढ़ेगी।
The hyperloop project at @iitmadras; Government-academia collaboration is driving innovation in futuristic transportation. pic.twitter.com/S1r1wirK5o
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 24, 2025
क्या है हाइपरलूप प्रोजेक्ट?
हाइपरलूप एक अत्यधिक उच्च गति वाली परिवहन प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एक वैक्यूम ट्यूब के भीतर इलेक्ट्रोमैगनेटिक पॉड के जरिए ट्रेन चलती है। यह ट्रेन बेहद उच्च गति से दौड़ती है और इसमें कोई भी घर्षण या हवा के खिंचाव का सामना नहीं करना पड़ता। हाइपरलूप प्रणाली को परिवहन का पांचवां साधन भी माना जाता है, और इसका उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण मित्र तरीके से मंजिल तक पहुंचाना है।

विशेषताएँ और लाभ
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हाइपरलूप के संचालन के लिए एक विशेष वैक्यूम ट्यूब का उपयोग किया जाता है जिसमें एक इलेक्ट्रोमैगनेटिक पॉड होता है। इस प्रणाली के द्वारा घर्षण और हवा का खिंचाव समाप्त कर दिया जाता है, जिससे यह पॉड 1.0 मैक तक गति हासिल करने में सक्षम होता है। हाइपरलूप प्रणाली किसी भी मौसम में कार्य कर सकती है और इसमें टकराव की संभावना भी न के बराबर रहती है। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली बिजली की कम खपत करती है और 24 घंटे संचालन के दौरान बिजली की बचत भी होती है।




