‘यह चुनाव देश बचाने का भी चुनाव है’ – अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दिल्ली की जनता को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान राज्य की आर्थिक नीतियों और सरकारी खर्च के मॉडल पर बड़ा बयान दिया। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के नागरिकों के पास दो विकल्प हैं—केजरीवाल मॉडल और बीजेपी मॉडल।

जनता के सामने दो मॉडल: केजरीवाल बनाम बीजेपी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा,
“दिल्ली की जनता के पास दो मॉडल हैं। पहला है केजरीवाल मॉडल, जहां जनता का पैसा जनता पर खर्च होता है, और दूसरा है बीजेपी मॉडल, जहां जनता का पैसा उनके अमीर दोस्तों की जेब में जाता है। अब जनता को तय करना है कि उसे कौन सा मॉडल चुनना है।”

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उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार अपने खास उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां बनाती है, जबकि आम आदमी पार्टी जनता की भलाई के लिए काम करती है।

‘देश बचाने का चुनाव है’: केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने इस चुनाव को सिर्फ दिल्ली के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह दो विचारधाराओं का टकराव है।

उन्होंने कहा,
“इस चुनाव में जनता को तय करना है कि राज्य का सरकारी खजाना और सरकारी पैसा कहां खर्च होना चाहिए। यह फैसला जनता को करना होगा कि उनका पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च हो या फिर कुछ गिने-चुने अमीर लोगों को फायदा पहुंचाने में।”

‘हर नागरिक देता है टैक्स’: सरकारी पैसे के खर्च पर उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल ने सरकारी खजाने के उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर नागरिक टैक्स देता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब। उन्होंने कहा,
“ग़रीब से ग़रीब आदमी भी टैक्स देता है। जब एक भिखारी माचिस खरीदता है या कोई गरीब व्यक्ति खाने-पीने की चीज़ें खरीदता है, तो वह भी टैक्स चुकाता है। यह सारा पैसा देश के गरीब, अमीर और मध्यम वर्ग से आता है, जिसे सरकार संचालित करती है।”

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उन्होंने कहा कि दिल्ली का चुनाव यह तय करेगा कि यह पैसा कहां खर्च होना चाहिए—जनता की भलाई में या अमीर दोस्तों के लाभ में।

‘जनता के पैसे खर्च करने के दो तरीके’: केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जनता के पैसे खर्च करने के दो तरीके हो सकते हैं।

पहला तरीका:
“इस पैसे से जनता के कल्याण की योजनाएं बनाई जाएं, स्कूल और अस्पतालों का निर्माण हो, जहां अच्छी और मुफ्त शिक्षा एवं इलाज मिले। महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिले। देश में बेहतर सड़कें बनें, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।”

दूसरा तरीका:
“जनता के पैसे का उपयोग कुछ अरबपति दोस्तों को कर्ज देने में किया जाए और फिर कुछ समय बाद वह कर्ज माफ कर दिया जाए। इससे सिर्फ उद्योगपतियों को लाभ होगा, जबकि आम जनता को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा।”

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