नई दिल्ली: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा का आज 6वां दिन है। इस यात्रा का मार्ग मंगलवार को झांसी के मऊरानीपुर से घुघसी गांव तक तय किया गया। यात्रा में शामिल पदयात्रियों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। यात्रा के दौरान शास्त्री ने न केवल भारतीय हिंदू समाज की एकजुटता की बात की, बल्कि बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों और देश की आंतरिक स्थिति पर भी गंभीर विचार व्यक्त किए।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार पर शास्त्री का बयान
यात्रा के दौरान शास्त्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे बढ़ते अत्याचारों को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “भारत के हिंदू अगर चुप रहे तो एक-एक कर तुम्हारे मंदिर मस्जिद में तब्दील हो जाएंगे। बांग्लादेश में अगर हिंदू कायर होंगे तो वहां के हिंदू भी नहीं बच पाएंगे। यह हमारी संस्कृति की रक्षा की लड़ाई है। हम अपने लिए नहीं, बल्कि 100 करोड़ हिंदुओं के लिए लड़ रहे हैं।”
उन्होंने बांग्लादेश के इस्कॉन पुंडरीक धाम के अध्यक्ष चिन्मय कृष्णन दास (चिन्मय प्रभु) की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया, जो शेख हसीना सरकार द्वारा हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। शास्त्री ने कहा, “चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय सुरक्षित नहीं है। हम बांग्लादेश के हिंदुओं के साथ खड़े हैं और उनका समर्थन करते हैं।”
संविधान दिवस पर शास्त्री ने उठाई कानून और व्यवस्था की चिंता
आज के दिन संविधान दिवस भी है, और शास्त्री ने इस अवसर पर भारत में बढ़ती कानून और व्यवस्था की समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हमारी यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में कानून की स्थिति बहुत गंभीर होती जा रही है। हम बांग्लादेश बनने की कगार पर हैं, जहां हिंदुओं के अधिकारों की लगातार अनदेखी हो रही है। अगर हिंदू समुदाय आवाज नहीं उठाएगा तो भविष्य में हमारे अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?”
धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा और हिंदू एकता की आवश्यकता
यात्रा के दौरान शास्त्री ने कहा, “यह यात्रा बजरंगबली की यात्रा है, यह रामराजा सरकार से मिलन की यात्रा है। यह हिंदू समाज की जागृति का प्रतीक है। अगर 100 करोड़ हिंदू में से 1 करोड़ कट्टर हिंदू एक हो जाएं तो किसी भी ताकत के पास सनातन धर्म पर ऊंगली उठाने का साहस नहीं होगा।”
उन्होंने कहा, “हम संविधान को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि देश में जगह-जगह हिंसा और हमले हो रहे हैं। इन घटनाओं से यह साफ दिखता है कि इस प्रकार की हिंसा पूर्वनियोजित होती है, और इसके पीछे किसी बड़े उद्देश्य का समर्थन किया जाता है।”
धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा की अहमियत
शास्त्री ने इस यात्रा को एक आध्यात्मिक यात्रा और हिंदू धर्म की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, “यह यात्रा हिंदू समाज को जागृत करने के लिए है, ताकि हम अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा कर सकें। आज संविधान दिवस पर, हम सभी को यह याद रखना चाहिए कि हमें अपनी पहचान और संस्कृति के लिए एकजुट होना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा गांव-गांव, गली-गली तक पहुंचेगी और भारत के प्रत्येक हिंदू को यह संदेश देगी कि हम सभी को अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए खड़ा होना होगा।





