झुंझुनू, 16 जून: बीडीके अस्पताल के पालनागृह में शनिवार देर रात एक नवजात शिशु को लावारिस अवस्था में छोड़ दिया गया। समय से पहले जन्मे इस बच्चे की सांसें रुक गई थीं, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने त्वरित सीपीआर देकर उसकी जान बचा ली।
प्री-मैच्योर डिलीवरी:
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे का जन्म 6 से 12 घंटे पहले ही हुआ है, संभवतः किसी अस्पताल में। समय से पहले जन्म होने के कारण उसकी हालत काफी नाजुक है।
सीपीआर ने बचाई जान:
रात 9:35 बजे, जब अस्पताल स्टाफ को पालनागृह से बेल की आवाज सुनाई दी, तो उन्होंने वहां पहुंचकर नवजात को देखा। बच्चे की सांसें रुक चुकी थीं। तुरंत मौजूद स्टाफ ने सीपीआर देना शुरू किया। थोड़ी देर बाद, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र भांबू और डॉ. विजय झाझड़िया मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्चे को भर्ती कर इलाज शुरू किया।
गंभीर हालत:
डॉ. भांबू ने बताया कि बच्चे का वजन करीब डेढ़ किलो है। उसकी हालत गंभीर है, क्योंकि उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है।
पहले भी मिल चुका है लावारिस बच्चा:
गौरतलब है कि 22 मई को भी बीडीके अस्पताल के पालनागृह में एक लावारिस बच्चा मिला था।
पुलिस जांच:
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।





