बबाई: क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराध, सड़क दुर्घटनाओं और बच्चों से जुड़े कानूनी मामलों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान के तहत विज्ञान चिल्ड्रन एकेडमी बबाई में करीब एक हजार विद्यार्थियों और सुरक्षा सखियों को साइबर अपराध, यातायात नियमों, पोक्सो अधिनियम और बाल विवाह कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे बच्चों और समाज को सुरक्षित बनाया जा सके।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चला जागरूकता अभियान
झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय के निर्देशन में जिले भर में सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी है। इसी कड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय देवेन्द्र सिंह राजावत के मार्गदर्शन और खेतड़ी वृताधिकारी जुल्फीकार अली की निगरानी में पुलिस थाना बबाई द्वारा यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विज्ञान चिल्ड्रन एकेडमी में हुआ कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन विज्ञान चिल्ड्रन एकेडमी बबाई में किया गया, जहां थानाधिकारी राजपाल के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं और सुरक्षा सखियों को विभिन्न सामाजिक और कानूनी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में करीब 900 से 1000 छात्र-छात्राओं की भागीदारी रही, जिससे इसकी व्यापकता और प्रभावशीलता स्पष्ट होती है।
साइबर अपराध से बचाव पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी शेयरिंग और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों के तरीकों के बारे में बताया गया। साथ ही सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, मजबूत पासवर्ड, संदिग्ध लिंक से दूरी और किसी भी साइबर घटना की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई।
यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा की दी गई जानकारी
पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को यातायात नियमों के पालन का महत्व समझाते हुए हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, तेज गति से वाहन न चलाने और नाबालिगों द्वारा वाहन न चलाने जैसे नियमों पर जागरूक किया। सड़क सुरक्षा को जीवन सुरक्षा से जोड़ते हुए नियमों के उल्लंघन से होने वाले हादसों के उदाहरण भी साझा किए गए।

पोक्सो अधिनियम और बाल विवाह कानून पर जागरूकता
कार्यक्रम में लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की जानकारी देते हुए बताया गया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण कानूनन गंभीर अपराध है। इसके साथ ही बाल विवाह कानून के तहत दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी गई और समाज से इस कुप्रथा को खत्म करने का आह्वान किया गया।
सुरक्षा सखियों की भूमिका पर भी हुआ संवाद
कार्यक्रम में उपस्थित सुरक्षा सखियों को महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि वे किस तरह से बच्चों और महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में पुलिस और समाज के बीच सेतु का काम कर सकती हैं।





