Wednesday, March 11, 2026
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77वां गणतंत्र दिवस 2026: क्यों खास हैं इस साल के चीफ गेस्ट? यूरोपियन यूनियन के दो बड़े चेहरे कर्तव्य पथ पर करेंगे शिरकत

नई दिल्ली: 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ सैन्य ताकत और सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन नहीं होती, बल्कि भारत की कूटनीतिक दिशा भी दिखाती है। 77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर भारत ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए यूरोपियन यूनियन के दो शीर्ष नेताओं को चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया है। यह कदम भारत-EU संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा क्यों है?

गणतंत्र दिवस पर विदेशी चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा 26 जनवरी 1950 से शुरू हुई थी, जब भारत ने संविधान लागू कर खुद को गणराज्य घोषित किया। उस समय भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता था कि वह एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और वैश्विक सोच वाला राष्ट्र है। इसलिए इस दिन को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए विदेशी अतिथियों को आमंत्रित करने की शुरुआत हुई।

पहली बार कौन बने थे गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट?

भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो को मुख्य अतिथि बनाया गया था। वजह साफ थी—इंडोनेशिया भी उपनिवेशवाद से आजाद हुआ था और एशिया में भारत का करीबी सहयोगी माना जाता था। यहीं से भारत की कूटनीतिक परंपरा की मजबूत नींव पड़ी।

77वें गणतंत्र दिवस 2026 के चीफ गेस्ट क्यों हैं बेहद खास?

इस साल भारत ने एक नहीं, बल्कि दो अंतरराष्ट्रीय नेताओं को चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट हैं, यूरोपियन यूनियन की नीतियों और प्रशासन की प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं। वहीं एंटोनियो कोस्टा, यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट के तौर पर EU समिट्स की अध्यक्षता करते हैं और सदस्य देशों के बीच सामंजस्य की अहम भूमिका निभाते हैं।
दोनों नेताओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि भारत अब यूरोपियन यूनियन के साथ रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देना चाहता है।

भारत-EU रिश्तों के लिहाज से क्यों अहम है यह न्योता?

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और जलवायु नीति जैसे मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे मंच पर EU के दो शीर्ष नेताओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत ग्लोबल डिप्लोमेसी में अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहता है।
यह फैसला न सिर्फ भारत की विदेश नीति को मजबूती देता है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अब बहुपक्षीय साझेदारियों में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

पिछले 10 सालों में किन देशों के नेता बने चीफ गेस्ट?

पिछले एक दशक में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, यूएई, जापान और अन्य रणनीतिक साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित किया। इन अतिथियों की मौजूदगी के जरिए भारत ने रक्षा समझौते, व्यापारिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर रिश्ते मजबूत किए।
हाल के वर्षों में फ्रांस के राष्ट्रपति, अमेरिका के शीर्ष नेता और खाड़ी देशों के प्रमुख शासक कर्तव्य पथ पर भारत के सम्मानित मेहमान बन चुके हैं, जिसने भारत की वैश्विक छवि को और ऊंचा किया।

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