झुंझुनूं: जिले की सूरजगढ़ तहसील में ग्राम पंचायत परिसीमन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ढाणी चौहाना में 50 लाख रुपए की लागत से बना अटल सेवा केंद्र शुरू हुए बिना ही प्रशासनिक फैसलों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनसंख्या मानकों की अनदेखी कर पंचायतों का गठन किया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ स्थानीय जनता को प्रशासनिक असुविधा झेलनी पड़ रही है।
50 लाख की लागत से बना अटल सेवा केंद्र, लेकिन उपयोग शून्य
राजस्व ग्राम ढाणी चौहान, जो ग्राम पंचायत डालमिया की ढाणी के अंतर्गत आता है, वहां 50 लाख रुपए की लागत से अटल सेवा केंद्र का निर्माण किया गया था। इस भवन का उद्घाटन 13 जनवरी 2025 को किया गया, लेकिन आज तक यहां नियमित कार्य शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों के अनुसार डालमिया की ढाणी में जगह के अभाव के कारण यह केंद्र ढाणी चौहान में सरकारी भूमि पर बनाया गया था, जहां सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं और चारदीवारी सहित पूर्ण भवन मौजूद है।
नगर पालिका चिड़ावा में शामिल हुआ परिसीमन क्षेत्र, बढ़ी जटिलताएं
परिसीमन प्रक्रिया के तहत राजस्व ग्राम डालमिया की ढाणी को नगर पालिका चिड़ावा में शामिल कर दिया गया। इसके साथ ही पड़ोसी ग्राम पंचायत अडूका के अंतर्गत आने वाले ढाणी ब्राह्मणों की और अडूका गांव को भी नगर पालिका चिड़ावा में सम्मिलित किया गया। इस निर्णय के बाद ग्रामीण अंचल की प्रशासनिक संरचना पूरी तरह बदल गई, जिससे नई पंचायतों की आवश्यकता और स्वरूप पर सवाल खड़े हो गए।
ढाणी चौहाना को ग्राम पंचायत बनाने का प्रस्ताव पहले ही दिया गया था
ग्रामीणों ने अप्रैल माह में जिला कलेक्टर झुंझुनूं के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज करवाई थी। इसमें प्रस्ताव रखा गया था कि ढाणी चौहानों की, ढाणी ब्राह्मणो की और तोला सेही को मिलाकर लगभग 3500 की आबादी वाली नई ग्राम पंचायत बनाई जा सकती है। इससे स्वामी सेही क्षेत्र में आने वाले बास कलाना, श्यालु कलां, श्यालु खुर्द और उधमपुरा को यथावत रखा जा सकता था और सरकार को अतिरिक्त पंचायत बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

जनसंख्या मानकों पर सवाल, उधमपुरा बनी नई पंचायत
ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए उधमपुरा को ग्राम पंचायत बना दिया गया, जबकि वहां की आबादी लगभग 1800 के आसपास है, जो निर्धारित नॉर्म्स को पूरा नहीं करती। इसके विपरीत स्वामी सेही ग्राम पंचायत में पांच गांव जोड़कर लगभग 6000 की आबादी कर दी गई और 13 वार्ड बना दिए गए, जिससे प्रशासनिक संतुलन बिगड़ गया है।
एक पंचायत में दो-दो अटल सेवा केंद्र, सरकारी धन का दुरुपयोग
ढाणी चौहाना को स्वामी सेही ग्राम पंचायत में शामिल करने के बाद स्थिति यह बन गई है कि एक ही ग्राम पंचायत क्षेत्र में दो अटल सेवा केंद्र हो गए हैं। एक ओर ढाणी चौहाना में नया और पूर्ण रूप से तैयार केंद्र है, वहीं दूसरी ओर स्वामी सेही में भी पंचायत संसाधन मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उधमपुरा को अलग पंचायत बनाया गया तो वहां नया ग्राम पंचायत भवन बनाना पड़ेगा, जिस पर 50 से 60 लाख रुपए तक का अतिरिक्त सरकारी खर्च आएगा।
मुख्यमंत्री से मांग: ढाणी चौहाना को बनाएं नई ग्राम पंचायत
एडवोकेट निहाल सिंह महरिया, जो अभिभाषक संघ चिड़ावा के सह सचिव भी हैं और ढाणी चौहाना वार्ड नंबर 07 से वार्ड सदस्य हैं, ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि ढाणी चौहाना, ढाणी ब्राह्मणो की और तोला सेही को मिलाकर नई ग्राम पंचायत ढाणी चौहाना का गठन किया जाए और उसका मुख्यालय ढाणी चौहाना में ही रखा जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल 50 लाख रुपए की सार्वजनिक धनराशि का सदुपयोग होगा, बल्कि ग्रामीणों को भी प्रशासनिक सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर शिकायतें, समाधान शून्य
ग्रामीणों ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर कई बार शिकायतें दर्ज करवाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में अब ग्रामीणों की उम्मीद सीधे मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर टिकी हुई है।
ग्रामीणों ने फिर उठाई मांग
ठेकेदार बलवीर जाखड़, जयराम जाखड़, सत्यवीर जाखड़, रघुबीर जांगिड़, मातादीन जांगिड़, भीम सिंह चौहान, मातु सिंह राठौड़, बेगराज, सुभाष जाखड़, सुनील चौहान, सुरेश महरिया, रामसिंह, सुमेर सिंह, मनफूल, जगदीश,सुरेश सैन, हुकमीचंद, महेंद्र गोयल, लालचंद मेघवाल, लालचंद जाखड़, धर्मेंद्र जाखड़,सुभाष महरिया, रिशाल महरिया,महिपाल बरवड़, जगदीश बरवड,संजय चाहर, शिव कुमार शर्मा,पवन शर्मा, भागूराम, श्रीचंद, मातादीन जांगिड़,सुरेश जांगिड़,रामस्वरूप जांगिड़ सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी इस मांग को दोहराया है।





