मुकुन्दगढ़: थाना क्षेत्र में सामने आई दिनदहाड़े लूट की सनसनीखेज वारदात महज 24 घंटे में झूठी साबित हो गई। झुंझुनू पुलिस की तेज़, तकनीकी और सूक्ष्म जांच ने यह साफ कर दिया कि करीब 10 लाख रुपये के आभूषण और नकदी की लूट की कहानी खुद परिवादिया ने रची थी।
क्या था मुकुन्दगढ़ की कथित लूट का मामला?
दिनांक 19 जनवरी 2026 को पुलिस थाना मुकुन्दगढ़ में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में परिवादिया ने आरोप लगाया कि दोपहर करीब एक बजे तीन महिलाएं और एक पुरुष उसके घर आए। घर का गेट खोलने पर सास के नाम से पांच हजार रुपये मांगने की बात कही गई और बाद में चाकू की नोक पर अलमारी की चाबी लेकर सोने-चांदी के आभूषण और नकदी लूट ली गई। परिवादिया ने यह भी दावा किया कि उसके चेहरे पर कोई अज्ञात पदार्थ डाल दिया गया, जिससे वह बेहोश हो गई।

गंभीर आरोपों के बाद पुलिस की आई हरकत में
करीब दस लाख रुपये से अधिक की डकैती का मामला होने के कारण पुलिस ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। थानाधिकारी ताराचंद के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ हुई और एमआईयू टीम द्वारा साक्ष्य संकलन किया गया।
बार बार बयान बदलने से बढ़ा शक
डीएसटी प्रभारी सरदारमल की अगुवाई में आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए, लेकिन किसी भी बाहरी संदिग्ध की गतिविधि सामने नहीं आई। इसी दौरान परिवादिया द्वारा बार-बार बयान बदलने, घटना के विवरण में विरोधाभास और कथित रसायन के कोई साक्ष्य न मिलने से जांच की दिशा बदल गई। शक की सुई सीधे परिवादिया पर टिकने लगी।
महिला पुलिस टीम की गहन पूछताछ में खुला पूरा सच
वृताधिकारी नवलगढ़ के निर्देश पर गठित महिला पुलिस टीम, जिसमें संतोष, महिला कांस्टेबल सुनिता और विनोद शामिल थीं, ने परिवादिया से लगातार निगरानी और गहन पूछताछ की। कई दौर की पूछताछ के बाद अंततः परिवादिया टूट गई और उसने स्वीकार कर लिया कि लूट की पूरी कहानी मनगढ़ंत थी।
पलंग के अंदर छुपे मिले जेवर, खुद कबूली साजिश
परिवादिया ने पुलिस की मौजूदगी में घर के भीतर पलंग के अंदर छुपाए गए सभी आभूषण और नकदी बरामद करवाई। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य जेवरात बेचकर अलग से प्लॉट खरीदना था और परिवार को गुमराह करने के लिए उसने लूट की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई।
24 घंटे में खुलासा, झुंझुनू पुलिस की बड़ी सफलता
इस पूरे मामले का महज 24 घंटे में खुलासा होना झुंझुनू पुलिस की कार्यकुशलता, तकनीकी दक्षता और समर्पित जांच का उदाहरण है। पुलिस टीम में ताराचंद, सरदारमल, संतोष, बाबूलाल, मुल्तानाराम, विक्रम, शिवप्रसाद, सुनिता मकानी, विनोद मकानी, प्रमोद लाठर, महिपाल, सत्यवीर, दयानंद सहित एमआईयू और डीएसटी के कार्मिकों की अहम भूमिका रही।




