Wednesday, February 18, 2026
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10 साल में भारत बना ‘स्टार्टअप पावरहाउस’: 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप, 21 लाख नौकरियां, सरकार का फोकस अब AI और डीप टेक

नई दिल्ली: स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत के दस साल बाद देश एक आर्थिक क्रांति के निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 16 जनवरी 2016 को शुरू हुई इस योजना ने भारत को तेजी से नौकरी मांगने वालों के देश से नौकरी देने वाले राष्ट्र में बदला। बीते दशक में देश दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरा है, जहां 2 लाख से ज्यादा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप काम कर रहे हैं और 21 लाख से अधिक नौकरियां पैदा कर चुके हैं। सरकार अब ई-कॉमर्स के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप टेक, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे सेक्टरों पर फोकस कर रही है।

स्टार्टअप इंडिया के 10 साल: आंकड़े बताते हैं बदलाव

पहल के लॉन्च के समय जहां पूरे देश में लगभग 400 स्टार्टअप दर्ज थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 2 लाख से अधिक को पार कर चुकी है। इन स्टार्टअप्स की तेजी से बढ़ती उपस्थिति ने देश को वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना दिया है, जो हर वर्ष करीब 12 से 15 प्रतिशत की दर से विस्तार कर रहा है। भारत में मौजूद 120 यूनिकॉर्न की कुल वैल्यू 350 अरब डॉलर से अधिक है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में ही 44 हजार से अधिक नए स्टार्टअप जोड़े गए और शायद पहली बार स्टार्टअप फेल्योर रेट पांच साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंची है।

रोजगार, निवेश और नए अवसर

DPIIT के अनुसार स्टार्टअप्स ने अब तक देश में 21 लाख से ज्यादा नौकरियां तैयार की हैं। औसतन हर स्टार्टअप 11 लोगों को रोजगार दे रहा है। वहीं सरकारी नीतियों ने वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी निवेश को बढ़ाया है, जिसके चलते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 150 अरब डॉलर से अधिक निजी पूंजी का प्रवाह दर्ज किया गया। टैक्स में तीन साल की छूट, कॉम्प्लायंस में ढील और सेल्फ-सर्टिफिकेशन जैसी सुविधाओं ने नए उद्यमों को जमीन पर उतारने में निर्णायक भूमिका निभाई।

बड़े शहरों से आगे निकलते छोटे कस्बे और महिलाएं

बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर आर्थिक परिवर्तन की अगुवाई कर रहे हैं। लेकिन रिपोर्ट दिखाती है कि स्टार्टअप अब केवल मेट्रो शहरों का विषय नहीं रहे। देश में करीब आधे स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरते दिख रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि नवाचार गांवों और कस्बों में भी तेजी से फैल रहा है। खास बात यह है कि 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप में महिलाएं महत्वपूर्ण साझीदार या नेतृत्व की भूमिका में हैं।

भविष्य की दिशा—AI, डीप टेक और सामरिक सेक्टर

अब सरकार का ध्यान केवल रिटेल और डिजिटल बिजनेस तक सीमित नहीं है। नीति-निर्माता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष तकनीक, रक्षा और फार्मा इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से अवसर तैयार कर रहे हैं। भारत में अब हजार से अधिक रक्षा स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनके साथ ही 380 से ज्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप और लगभग 900 जेनरेटिव एआई कंपनियां समाधान विकसित कर रही हैं। सरकार की खरीद नीतियों और आर्थिक प्रोत्साहन ने इन विचारों को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने का रास्ता आसान बना दिया है।

10 साल बाद तस्वीर क्या बताती है

स्टार्टअप इंडिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नए DNA के साथ पुनर्परिभाषित किया है। नए बिजनेस, टेक्नोलॉजी और निवेश माहौल ने युवाओं को जोखिम लेने, प्रयोग करने और रोजगार पैदा करने के लिए तैयार किया। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत अब ऐप आधारित उद्यमों से आगे बढ़कर खुद भविष्य की तकनीक बनाने की दौड़ में शामिल हो चुका है। आने वाले वर्षों में देश कृषि तकनीक, स्पेस-टेक, AI और रक्षा क्षेत्र में वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में ज्यादा ताकत से उभर सकता है।

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