बिहार: पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने अब खौफनाक मोड़ ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए गंभीर खुलासों से साफ है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि डेढ़ से दो घंटे तक चली क्रूरता और यौन हिंसा का मामला है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, SIT की जांच, गर्ल्स हॉस्टल की लापरवाही और राजनीतिक सवालों के बीच अब बिहार पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
पटना में नीट की तैयारी के लिए रह रही छात्रा की मौत के मामले में मेडिकल बोर्ड ने ऐसी रिपोर्ट दी है जिसने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर दिया है। छात्रा के प्राइवेट पार्ट पर गहरे जख्म मिले हैं, जिसके बाद यह आशंका और मजबूत हो गई है कि इस वारदात में एक से अधिक हमलावर शामिल थे। रिपोर्ट ने उन शुरुआती दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें मौत का कारण तनाव या बीमारी बताया जा रहा था।
दो घंटे लंबा संघर्ष, पूरे शरीर पर चोटें
फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने हमलावरों से डेढ़ से दो घंटे तक संघर्ष किया। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार गर्दन, कंधों और छाती पर मिले नाखूनों के गहरे निशान इस बात की पुष्टि करते हैं कि लड़की को दबोचकर रोका गया और उसने जान बचाने की पूरी कोशिश की। उसकी पीठ, बांहों और कंधों पर मल्टीपल खरोंच और नीले निशान मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि उसे किसी कठोर सतह पर दबाकर रखा गया।
SIT जांच में हॉस्टल बाहर खड़ी महंगी गाड़ियों की जांच शुरू
विशेष जांच दल ने खुलासा किया है कि जिस गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा रहती थी, वहाँ रात के समय महंगी गाड़ियाँ आने-जाने की घटनाएँ आम थीं। स्थानीय लोगों ने पुलिस को शिकायतें भी दी थीं लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब सीसीटीवी फुटेज खंगालकर उन वाहनों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है कि वे कौन ला रहा था और किससे मिलने आता था।
हॉस्टल प्रबंधन पर सवाल, परिजनों ने लगाए आरोप
छात्रा के परिवार ने दावा किया है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने मामले को डिप्रेशन और आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि तीन संदिग्धों को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया और हॉस्टल संचालक ने पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश की। मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के लिए इंसाफ मांगने पर उल्टा परिवार पर दबाव बनाया गया।
महिला आयोग का हस्तक्षेप, नई गाइडलाइन जल्द
बिहार राज्य महिला आयोग ने कहा है कि राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने घोषणा की कि हॉस्टलों के लिए नई और कड़ी गाइडलाइन लागू की जाएगी ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रिया, पुलिस पर पक्षपात के आरोप
जन सुराज के प्रशांत किशोर ने पटना पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश में जुटा है और पीड़ित परिवार को एफआईआर वापस लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि इस केस में सच्चाई छिपाने की कोशिश हो रही है।
जन आक्रोश, जहानाबाद में कैंडल मार्च
पटना की छात्रा के साथ हुई इस घटना के खिलाफ बिहार में आक्रोश बढ़ रहा है। जहानाबाद और अन्य शहरों में कैंडल मार्च निकाले गए और हजारों लोगों ने छात्रा के लिए न्याय की मांग की। भीड़ ने सवाल पूछा—क्या पढ़ाई करने आई बेटियों की सुरक्षा सिर्फ कागज पर है?
SIT की कमान ज़ोनल IG के हाथ
मामले के बढ़ते दबाव के बाद पुलिस मुख्यालय ने हाई लेवल SIT बनाई है। छात्रा के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच जारी है। विसरा रिपोर्ट एम्स भेजी गई है ताकि मौत के असली कारण की अंतिम पुष्टि हो सके।





