पिलानी: कस्बे में अखिल भारत हिन्दू महासभा की प्रदेश कोर कमेटी की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें राजस्थान में संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने, हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार और गौवंश संरक्षण जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में तहसील, गांव और ढाणी स्तर तक संगठन विस्तार को प्राथमिक लक्ष्य बताया गया, वहीं गौशालाओं को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए गए।
अखिल भारत हिन्दू महासभा की यह बैठक प्रदेश कोर कमेटी अध्यक्ष डॉ राजेंद्र शर्मा झेरलीवाल के पिलानी स्थित निवास पर संपन्न हुई। बैठक में संगठनात्मक मजबूती, वैचारिक विस्तार और सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर प्रदेश स्तर से लेकर जिला इकाई तक के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार पुनिया, प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन कुमार सुरा, झुंझुनूं जिला अध्यक्ष सुनील कुमार पुनिया और झुंझुनूं कार्यकारी जिला अध्यक्ष सुभाष चंद्र योगी ने संगठन की वर्तमान स्थिति और आगामी रणनीतियों पर अपने विचार रखे। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि हिंदुत्व विचारधारा को मजबूती देने के लिए संगठन को तहसील, गांव और ढाणी स्तर तक सक्रिय किया जाना आवश्यक है।
बैठक में प्रदेश महामंत्री भागीरथ सिंह पिलानिया ने वीडियोकॉल के माध्यम से सहभागिता की। उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्यक्रमों को लेकर सुझाव दिए और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर बल दिया।
डॉ राजेंद्र शर्मा झेरलीवाल ने बैठक में गौमाता की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गौवंश सनातन धर्म की वाहक है और इसकी रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि राजस्थान सरकार द्वारा गौशालाओं के लिए रोका गया अनुदान गौवंश के साथ सौतेला व्यवहार दर्शाता है।
बैठक में यह मांग रखी गई कि केंद्र और राज्य सरकारें अधिक से अधिक गौशालाओं के संचालन और स्थापना के लिए ठोस कदम उठाएं। वक्ताओं ने कहा कि गौसंरक्षण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि अखिल भारत हिन्दू महासभा आने वाले समय में हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार को और तेज करेगी। इसके लिए संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानों और सामाजिक संवाद को मजबूत किया जाएगा, ताकि सनातन मूल्यों को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सके।





