चिड़ावा: सोमानी एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित चिड़ावा कॉलेज में सेना स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शौर्य दिवस मनाया गया। एनसीसी कैडेट्स ने भारतीय सेना की वीर परंपरा को याद करते हुए देशभक्ति का संदेश दिया। कार्यक्रम में सैन्य इतिहास, कारगिल के रणबांकुरों के साहस और आधुनिक भारत की बढ़ती प्रतिरक्षा शक्ति की जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया।
एनसीसी कैडेट्स ने दी वीरों को श्रद्धांजलि
15 जनवरी को आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य ऋचा कुलश्रेष्ठ ने की। कार्यक्रम में एनसीसी इकाई के कैडेट्स ने भारतीय सेना के इतिहास, राष्ट्र रक्षा में योगदान और देश की सुरक्षा में सैनिकों की भूमिका को याद किया। भारत की तीनों सेनाओं के पराक्रम और अनुशासन पर आधारित प्रेरक प्रस्तुतियां भी दी गईं।
सेना स्थापना दिवस का ऐतिहासिक महत्व बताया
एनसीसी प्रभारी और एएनओ जितेंद्र सिंह शेखावत ने विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए कहा कि 15 जनवरी 1949 को के एम करियप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। इसी दिन को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है और तब से यह देश में वीरता, प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुका है।
भारतीय सेना की आधुनिक क्षमता पर दिया संदेश
समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्य ऋचा कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारतीय सेना आज सिर्फ संख्या बल में ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, मिसाइल तकनीक और आधुनिक युद्धक क्षमता में विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल है। उन्होंने युवा पीढ़ी को रक्षा सेवाओं में योगदान देने की प्रेरणा दी।

कारगिल के शहीदों को किया नमन
डॉ ऋचा कुलश्रेष्ठ ने अपने वक्तव्य में कारगिल युद्ध में बलिदान देने वाले परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा सहित असंख्य सैनिकों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र अपनी सीमाओं पर तैनात हर सैनिक का ऋणी है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन एनसीसी कैडेट कपिल यादव ने किया। कैडेट्स ने राष्ट्रगान, प्रेरक नारे और सूचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से कार्यक्रम को ऊर्जावान और भावनात्मक बनाया, जिससे सभागार में देशभक्ति का वातावरण गूंज उठा।





