मंड्रेला: कस्बे में महिलाओं की आवाज़ और नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। पीरामल फाउंडेशन और महिला अधिकारिता विभाग की ओर से आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में 50 से ज्यादा स्थानीय महिलाओं ने भाग लेकर शिक्षा, आत्मनिर्भरता और निर्णय क्षमता की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया। महिला सशक्तिकरण, महिला नेतृत्व विकास और उद्यमिता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
अग्रसेन भवन में हुआ सामुदायिक कार्यक्रम, 50 से अधिक महिलाएं हुईं शामिल
पुराना बस स्टैंड स्थित अग्रसेन भवन में सोमवार को पीरामल फाउंडेशन और महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त प्रयास से महिला जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करुणा फेलो पूजा सैनी ने किया। पूजा सैनी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए स्वरोजगार के महत्व पर चर्चा की और उन्हें उद्यमशीलता की मानसिकता अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने प्रेरक व्यक्तित्व नीरू यादव और मंजू तंवर की संघर्ष व सफलता की कहानियां साझा कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने की अपील की।
बालिका शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्र में — ग्रामीण नेतृत्व को मिला नया दृष्टिकोण
ग्राम साथिन विनोद देवी ने बालिका शिक्षा की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि पढ़ी-लिखी बेटी अपने भविष्य के साथ दो परिवारों को उजाला देती है। इस बातचीत में सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण महिलाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा की गई, जिससे उपस्थित महिलाओं को योजनाओं की जानकारी और लाभ लेने के तरीके समझाए गए।
मतदान, निर्णय क्षमता और नागरिक अधिकारों पर जागरूकता
पिरामल फाउंडेशन के शेर सिंह राजपूत ने बताया कि महिलाओं का हर निर्णय सामाजिक बदलाव की दिशा में योगदान देता है। उन्होंने मतदान, बच्चों की शिक्षा में समान अवसर, और घर-परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों में महिला भूमिका को निर्णायक मानते हुए ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

‘खुशियों का गुल्लक’ बना कार्यक्रम का आकर्षण
इस कार्यक्रम में सामाजिक और भावनात्मक विकास के उद्देश्य से ‘खुशियों का गुल्लक’ अवधारणा को प्रस्तुत किया गया। महिलाओं ने अपनी छोटी-छोटी खुशियों, सपनों और आकांक्षाओं को साझा करते हुए सामुदायिक भावना का मजबूत परिचय दिया।
स्वयं पर ध्यान — “आपके लिए खुशी क्या है?” ने छुआ दिल
गांधी फेलो वर्षा शुक्ला ने संवाद करते हुए बताया कि महिलाएं जीवनभर परिवार और समाज को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन खुद की खुशी और सपनों को अक्सर भूल जाती हैं। उनके सवाल— “आखिर आप खुद के लिए कब जीती हैं?” ने उपस्थित महिलाओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
सामुदायिक योगदान से सफल हुआ आयोजन
आंगनवाड़ी, आशा वर्कर और स्थानीय समाज से जुड़े लोग आयोजन का अहम हिस्सा बने। मीनू कंवर, विनोद सिंह निर्माण, सुशील जोशी और सुशील रूंगटा ने कार्यक्रम की व्यवस्था और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह पहल सफल हो सकी।





