Wednesday, February 11, 2026
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श्रीगंगानगर में 1621 करोड़ बैंक घोटाले का बड़ा खुलासा, बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ साइबर फ्रॉड

श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर में CBI (जोखिम) ने 1621 करोड़ रुपए के बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस का खुलासा किया है, जिसमें पंजाब एंड सिंध बैंक के दो तत्कालीन ब्रांच मैनेजरों विकास वाधवा और अमन आनंद समेत 30 से ज्यादा लोग और फर्में आरोपी हैं। फर्जी कंपनियों, म्यूल अकाउंट्स, और साइबर क्राइम के जरिए यह घोटाला किया गया, जिससे बैंकिंग सिस्टम की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

CBI जांच और एफआईआर

21 जुलाई 2025 को शुरू हुई CBI जांच में एजेंसी ने 13 जनवरी 2026 को दो अलग-अलग FIR दर्ज कीं, जिसमें पंजाब एंड सिंध बैंक के दो तत्कालीन ब्रांच मैनेजर विकास वाधवा और अमन आनंद मुख्य आरोपी हैं। CBI ने आरोप लगाया कि यह पूरा बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क फर्जी फर्मों, जाली केवाईसी दस्तावेजों और म्यूल अकाउंट्स के सहारे संचालित हुआ।

फर्जी फर्में और म्यूल अकाउंट का नेटवर्क

CBI के मुताबिक इसमें कुल 17 फर्जी कंपनियों के नाम पर म्यूल करंट खाते खोले गए, जिनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और अवैध कमाई को रूट, लेयर और ट्रांसफर करने के लिए किया गया, ताकि काले धन के स्रोत को छुपाया जा सके। आरोपियों ने फर्जी रेंट एग्रीमेंट, बनावटी सहायक दस्तावेज़ और जाली KYC डॉक्यूमेंट तैयार करवाकर बैंक शाखाओं में जमा करवाए।

श्रीगंगानगर मुख्य शाखा में खुलें फर्जी खाते, गर्ल्स स्कूल ब्रांच में बड़े पैमाने पर घोटाला

मुख्य शाखा, श्रीगंगानगर में 19 जून से 9 जुलाई 2024 के बीच 4 फर्जी खाते खोले गए, जिनमें लगभग 537 करोड़ रुपए का लेन-देन दर्ज हुआ। गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल शाखा में अगस्त 2024 से मार्च 2025 के बीच 13 खाते खोलकर लगभग 1084 करोड़ रुपए का लेन-देन किया गया।

CBI के अनुसार, दोनों शाखाओं में अधिकारी मौके पर गए बिना ही फर्जी साइट विजिट रिपोर्ट और बिजनेस वेरिफिकेशन तैयार कर BANK सिस्टम में जमा करवा रहे थे, जिससे खाते आसानी से खुलते रहे।

साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम की रणनीति

इस पूरे बैंकिंग फ्रॉड घोटाले में आरोपी ब्लैक मनी को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से लेयरिंग और ट्रांसफर करने का काम कर रहे थे, जिससे काली कमाई सफेद लगे। इस प्रक्रिया में म्यूल अकाउंट्स का जाल व्यापक रूप से इस्तेमाल हुआ, जिससे लेन-देन को जटिल बनाकर असली स्रोत छिपाया गया।

प्रमुख आरोपियों की भूमिका

CBI FIR में बताया गया है कि मुख्य आरोपी विकास वाधवा (सीनियर मैनेजर, गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल ब्रांच) और अमन आनंद (चीफ मैनेजर, मुख्य शाखा, श्रीगंगानगर) ने आदित्य गुप्ता उर्फ विशाल गुप्ता (जीरकपुर, चंडीगढ़), प्रवीण अरोड़ा, प्रेम कुमार सैन और आतिल खान के साथ मिलकर इस फ्रॉड को अंजाम दिया। इन आरोपियों ने मिलकर फर्जी फर्मों का नेटवर्क तैयार किया और सह-आरोपियों के साथ मिलकर बैंकिंग सिस्टम में भारी वित्तीय गड़बड़ी की।

आगे की जांच

CBI की जांच जारी है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर फ्रॉड, बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और आधिकारिक मिलावट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इस मामले से बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा, KYC मानकों और आंतरिक निगरानी की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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