पिलानी: स्वतंत्रता सेनानी व आजाद हिंद फौज के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर झुंझुनूं जिले के पिलानी और डुलानिया गांव में भावनात्मक और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्रांतिकारी विचारों, समाजवादी सोच और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की विरासत को याद करते हुए युवाओं ने उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।
डुलानिया गांव के बस स्टैंड पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता भीम सिंह पूनिया ने की। संचालन ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के महादेवाराम जांगिड़ ने किया।
राजेंद्र सिहाग ने आजाद के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है। मुख्य वक्ता शंकर दहिया ने किसानों और मजदूरों से अपील की कि वे आजाद के संघर्षशील विचारों को अपनाकर शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए संगठित हों।
कार्यक्रम में नंदलाल सैनी, लीलाधर मेघवाल, ईश्वर सिंह पूनिया, हनुमान प्रसाद भार्गव, रामेश्वर राजपूत, जसवीर पूनिया, धर्मपाल लंबा, जयकरण, अतर सिंह मेघवाल, बाबूलाल पारीक और मदन सिंह चंदीवाल सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन त्याग, साहस और क्रांतिकारी सोच का प्रतीक है। उनके गैर-समझौतावादी रुख और देशभक्ति से आज के युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।
शहादत दिवस कार्यक्रमों में युवाओं की बड़ी भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता संग्राम के महानायक आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अन्याय जैसी समस्याएं मौजूद हैं, तब तक आजाद के विचार प्रासंगिक रहेंगे।

सभा के उपरांत बेरोजगारी, प्रश्नपत्र लीक प्रकरण और बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई।
यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहे, बल्कि सामाजिक सरोकारों, बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और किसान-मजदूर मुद्दों पर भी मुखर चर्चा का मंच बने।





