नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ताजा अनुमानों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आईएमएफ के जनवरी 2026 अनुमानों पर आधारित एक चार्ट साझा करते हुए एलन मस्क ने संकेत दिया है कि अब वैश्विक आर्थिक शक्ति का संतुलन तेजी से एशिया की ओर झुक रहा है। आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक वृद्धि में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, जो मौजूदा व्यापार तनाव और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच एक अहम संकेत माना जा रहा है।
बदलता वैश्विक आर्थिक संतुलन
एलन मस्क द्वारा साझा किए गए आईएमएफ आंकड़ों के अनुसार, 2026 में चीन और भारत मिलकर वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि का 43.6 प्रतिशत योगदान देंगे। इनमें भारत अकेले 17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि अमेरिका का योगदान 9.9 प्रतिशत आंका गया है। ये आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एशियाई देशों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और भारत उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में सामने आ रहा है।
IMF का वैश्विक वृद्धि अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2027 में यह 3.2 प्रतिशत हो सकती है। यह अक्टूबर 2025 में जारी अनुमानों से बेहतर स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तकनीकी निवेश में तेजी, अनुकूल वित्तीय हालात और निजी क्षेत्र की मजबूती ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर IMF की नजर
भारत को लेकर आईएमएफ ने सकारात्मक रुख दिखाया है। 2025 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया है। बेहतर तीसरी तिमाही और चौथी तिमाही की मजबूत आर्थिक गतिविधियों को इसका प्रमुख कारण बताया गया है। वहीं 2026 और 2027 में भारत की वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, क्योंकि अस्थायी कारकों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।
व्यापार तनाव और वैश्विक जोखिम
यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका ने कई देशों पर सख्त टैरिफ लागू किए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते चीन और भारत भी इन प्रभावों से अछूते नहीं रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बावजूद भारत और अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाएं घरेलू मांग, निवेश और तकनीकी विकास के दम पर आगे बढ़ रही हैं। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी निवेश से जुड़ी अनिश्चितताएं भविष्य के लिए जोखिम बनी हुई हैं।
महंगाई पर क्या कहता है IMF
आईएमएफ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक महंगाई दर में धीरे-धीरे नरमी देखने को मिलेगी। हालांकि अमेरिका में महंगाई को लक्ष्य स्तर तक लाने में अभी समय लग सकता है। भारत में 2025 के दौरान तेज गिरावट के बाद महंगाई के दोबारा लक्ष्य के करीब लौटने की उम्मीद जताई गई है।
क्यों अहम है एलन मस्क का बयान
एलन मस्क जैसे वैश्विक उद्योगपति द्वारा साझा किए गए ये आंकड़े सिर्फ एक आर्थिक अनुमान नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बदलती वैश्विक शक्ति संरचना का संकेत भी हैं। भारत का अमेरिका से आगे निकलना न केवल आर्थिक उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।





