पिलानी: अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा तहसील सभा ने विश्वकर्मा जयंती को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की पुरानी मांग को एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कहा कि राजस्थान में जांगिड़, सुथार और कई शिल्पकार समाज भगवान विश्वकर्मा की आराधना करते हैं, इसलिए ऐच्छिक अवकाश को सार्वजनिक अवकाश में बदला जाना अब समय की मांग है। प्रदेशभर में इस मुद्दे को लेकर समाज में गहरा असंतोष बताया जा रहा है।
पिलानी तहसील में जांगिड़ ब्राह्मण महासभा के कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि राजस्थान में जांगिड़ और सुथार समुदाय के अलावा स्वर्णकार, लुहार, पंचाल, ठठेरा, मूर्तिकार, कुमावत समेत अनेक परंपरागत शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। ज्ञापन में कहा गया कि मजदूर वर्ग, फैक्टरी कर्मचारी, इंजीनियर और कारीगर भी विश्वकर्मा पूजा के साथ ही अपने काम की शुरुआत करते हैं।
महासभा के सदस्यों ने बताया कि राजस्थान सरकार ने माघ शुक्ल त्रयोदशी पर विश्वकर्मा जयंती के लिए पहले से ऐच्छिक अवकाश का प्रावधान रखा है। पिलानी तहसील सभा का कहना है कि दशकों से इसे सार्वजनिक अवकाश बनाने की मांग की जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि अन्य समाजों के आराध्य दिवसों पर पहले ही सार्वजनिक छुट्टियां घोषित की जा चुकी हैं, जबकि शिल्पी समाज को लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है।
संगठन ने उम्मीद जताई कि मौजूदा कार्यकाल में सरकार समाज की भावनाओं का मान रखते हुए विश्वकर्मा जयंती को सार्वजनिक अवकाश घोषित करेगी। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह फैसला न सिर्फ परंपरागत शिल्पकार समुदाय, बल्कि पूरे श्रमिक वर्ग, उद्योग जगत और तकनीकी क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक होगा।
ज्ञापन सौंपने के बाद भगवान विश्वकर्मा मंदिर परिसर में तहसील सभा की बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता मामचन्द सोनानिया ने की, जबकि संरक्षक मुकुंदाराम जांगिड़, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनवारी जांगिड़ और महामंत्री रामनिवास जांगिड़ कार्यवाही में शामिल रहे। इसके साथ ही कोषाध्यक्ष अनिल जांगिड़, दुर्गा प्रसाद जांगिड़, परमेश्वर जांगिड़, पूरणमल जांगिड़, दिनेश राजोतिया और चंदन जांगिड़ सहित जांगिड़ समाज के अनेक सदस्य भी बैठक में मौजूद रहे।






